नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों की तैयारियों के बीच चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि चुनावी ड्यूटी में लगे किसी भी कर्मचारी को डराने या धमकाने की कोशिश किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आयोग ने दो टूक कहा कि बीएलओ, ईआरओ (ERO) एईआरओ या ऑब्जर्वर—सभी की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्रता सर्वोपरि है।
टीएमसी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद सख्त संदेश
बुधवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात की थी। इस बैठक के बाद पार्टी महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने आयोग पर कई सवाल उठाए थे। इसके जवाब में आयोग ने स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालने या कर्मचारियों को डराने की किसी भी कोशिश पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बीएलओ को बढ़ा मानदेय जल्द देने के निर्देश
चुनाव आयोग ने टीएमसी प्रतिनिधिमंडल को यह भी साफ किया कि राज्य सरकार को तुरंत बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) को बढ़ा हुआ मानदेय जारी करना चाहिए, जिसे आयोग की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है। आयोग ने कहा कि बीएलओ चुनावी व्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी अनदेखी से निष्पक्ष चुनाव प्रभावित हो सकते हैं।
हर इलाके में बनाए जाएंगे मतदान केंद्र
आयोग ने बताया कि मतदाताओं की सुविधा के लिए ऊंची आवासीय इमारतों, गेटेड कॉलोनियों और झुग्गी-बस्तियों में भी मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी मतदाता को वोट डालने में कठिनाई न हो और मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी हो।
कार्यकर्ताओं को चेतावनी, कानून हाथ में न लें
चुनाव आयोग ने टीएमसी को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि पार्टी यह सुनिश्चित करे कि उसके जमीनी स्तर के नेता या कार्यकर्ता चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को धमकाने या दबाव बनाने में शामिल न हों। आयोग ने कहा कि कानून अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव का भरोसा
आयोग ने दोहराया कि किसी भी चुनावी कर्मचारी को डराना गंभीर अपराध है और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं द्वारा दी गई किसी भी धमकी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चुनाव आयोग ने भरोसा दिलाया कि वह स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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