रिकॉर्ड तोड़ती गर्मी और बांदा का ‘हॉटस्पॉट’ बनना
भोपाल/जयपुर/लखनऊ/पटना: देश में नौतपा की शुरुआत 25 मई से होने वाली है, लेकिन उससे पहले ही सूरज के तेवर तीखे हो चुके हैं। उत्तर प्रदेश का बांदा(Banda) जिला 48°C तापमान के साथ दुनिया का तीसरा सबसे गर्म शहर रिकॉर्ड किया गया है। वैश्विक स्तर पर बांदा से आगे सिर्फ मिस्र का असवान (49.4°C) और सऊदी अरब का अराफात (48.4°C) ही रहे। मौसम वैज्ञानिकों(Scientists) के अनुसार, बांदा के सबसे गर्म होने के पीछे उसका कर्क रेखा के नजदीक होना, पठारी इलाका, सूखती नदियां और जंगलों की अंधाधुंध कटाई जैसे प्रमुख कारण हैं।
सूखी हवाओं का टॉर्चर और मानसून पर ब्रेक
मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, पाकिस्तान के बलूचिस्तान और थार मरुस्थल से आने वाली बेहद गर्म और सूखी हवाएं सीधे उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में दस्तक दे रही हैं, जिससे मई के महीने में ही जून जैसी झुलसाने वाली गर्मी पड़ रही है। इसके अलावा, मानसून भी पिछले तीन दिनों से अंडमान-निकोबार और कोलंबो के पास अटका हुआ है, जिसे आगे बढ़ने के लिए जरूरी अनुकूल परिस्थितियां नहीं मिल पा रही हैं। इस वजह से आने वाले दिनों में देश के अधिकांश हिस्सों को इस भीषण तपिश से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
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सेहत पर हीटवेव का हमला और बचाव के उपाय
इस जानलेवा गर्मी का सीधा असर लोगों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादा तापमान के कारण शरीर को ठंडा रखने में ऊर्जा ज्यादा खर्च होती है, जिससे चिड़चिड़ापन, गुस्सा और नींद न आने की समस्या बढ़ जाती है। एक्सपर्ट्स ने सलाह दी है कि सुबह 10 से दोपहर 3 बजे तक धूप में निकलने से बचें और प्यास न लगने पर भी दिनभर में कम से कम 4 लीटर पानी जरूर पियें।
देश के अन्य हिस्सों में भीषण गर्मी होने के बावजूद बांदा में सबसे ज्यादा तापमान रिकॉर्ड होने की मुख्य वजह क्या है?
बांदा में अत्यधिक गर्मी का मुख्य कारण इसका कर्क रेखा (Tropic of Cancer) के बेहद नजदीक होना है। इसके अलावा वहां सीधी पड़ने वाली धूप, आसमान का साफ होना, मिट्टी में नमी की कमी, सूखती नदियां, बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई और खनन भी इस भीषण तापमान के लिए जिम्मेदार हैं।
इस अत्यधिक गर्मी का इंसानी दिमाग और व्यवहार पर क्या असर पड़ता है और इससे बचने के लिए डॉक्टरों ने क्या सलाह दी है?
अत्यधिक तापमान के कारण मस्तिष्क में ‘फील गुड’ हार्मोंस का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे लोगों में गुस्सा, चिड़चिड़ापन और काम में फोकस की कमी होने लगती है। इससे बचने के लिए डॉक्टरों ने हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनने, धूप में शारीरिक मेहनत न करने और प्यास न लगने पर भी थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहने (दिन में लगभग 4 लीटर) की सलाह दी है।
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