Bengaluru Metro station naming controversy: “St Mary” बनाम “शंकर नाग”

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बेंगलुरु, 11 सितम्बर 2025 – कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में एक मेट्रो स्टेशन के नामकरण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) ने हाल ही में घोषणा की थी कि शिवाजीनगर मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर “St Mary” किया जाएगा। यह घोषणा उन्होंने प्रसिद्ध St Mary’s Basilica के वार्षिकोत्सव के दौरान की, और कहा कि इस नाम की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी जाएगी


क्यों आया विवाद?

जहाँ एक ओर ईसाई समुदाय और स्थानीय चर्च इससे खुश है, वहीं बड़ी संख्या में नागरिकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इसका कड़ा विरोध किया है। विरोध करने वालों का तर्क है कि स्टेशन का नाम शंकर नाग जैसे महान कन्नड़ अभिनेता और निर्देशक पर होना चाहिए था। शंकर नाग को बेंगलुरु की मेट्रो परियोजना का “सपनों का वाहक” माना जाता है। उन्होंने 1980 के दशक में ही आधुनिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम का खाका खींचा था।


लोगों की नाराज़गी

कई नेटिज़न्स ने लिखा कि “St Mary” नाम स्थानीय पहचान को नहीं दर्शाता, जबकि शंकर नाग का नाम बेंगलुरु और कर्नाटक की सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ा है। एक उपयोगकर्ता ने कहा, “शंकर नाग ने बेंगलुरु मेट्रो का सपना दिखाया था। अगर स्टेशन का नाम उन्हीं पर होता तो यह सही सम्मान होता।”

दूसरी ओर, कुछ लोगों का मानना है कि स्टेशन को उसके आस-पास की जगह या धार्मिक-ऐतिहासिक महत्व से जोड़कर नाम देना ठीक है। क्योंकि St Mary’s Basilica इस क्षेत्र की पहचान है और हर साल यहां हजारों श्रद्धालु आते हैं।


राजनीतिक पहलू

यह विवाद सिर्फ नामकरण तक सीमित नहीं है। राजनीतिक हलकों में भी इसे लेकर बयानबाजी शुरू हो गई है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सिद्धारमैया सरकार अल्पसंख्यकों को खुश करने के लिए ऐसा कदम उठा रही है। वहीं, सरकार का कहना है कि यह निर्णय समुदाय की भावनाओं का सम्मान करने के लिए है और अंतिम मंजूरी केंद्र को देनी है।


आगे की राह

  • प्रस्ताव फिलहाल केंद्र सरकार के पास भेजा जाना है, जिसके बाद ही अंतिम निर्णय होगा।
  • जनता की राय दो हिस्सों में बंटी है – एक तरफ़ धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान से जुड़े लोग, दूसरी ओर कन्नड़ संस्कृति और सिनेमा प्रेमी।
  • यह विवाद बेंगलुरु के शहरी विकास, सांस्कृतिक धरोहर और राजनीतिक समीकरणों को नई दिशा दे सकता है।

कुल मिलाकर, यह नामकरण विवाद सिर्फ़ एक मेट्रो स्टेशन के नाम का मामला नहीं है, बल्कि यह सवाल खड़ा करता है कि सार्वजनिक स्थानों का नामकरण किस आधार पर होना चाहिए – धार्मिक, सांस्कृतिक या ऐतिहासिक योगदान पर?

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