Latest News : मध्य प्रदेश में बाल विवाह के मामले लगातार बढ़ रहे

Read Time:  1 min
मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश
FONT SIZE
GET APP

मध्य प्रदेश में बाल विवाह रोकने (Child marriage) के लिए करोड़ों खर्च होने के बावजूद मामले लगातार बढ़ रहे हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2020 से 2025 तक बाल विवाह में वृद्धि हुई है, जो सरकार के प्रयासों पर गंभीर सवाल उठाती है. पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने बीजेपी सरकार पर सामाजिक कुरीतियों को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया है, जबकि सरकार जागरूकता अभियानों का दावा कर रही है।

देशभर में महिला एवं बाल विभाग में हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं. इन पैसों को इसलिए खर्च किया जाता है ताकि बाल विवाह को रोका जा सके. इसके साथ ही समाज में जागरुकता लाई जा सके. हालांकि ये पैसा मध्य प्रदेश (MP) बर्वाद होता दिखाई दे रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि यहां बाल विवाह के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. बाल विवाह के ताजा आंकड़े भी सामने आए हैं, जिसने हर किसी को चौंका दिया है. पूर्व मंत्री एवं राघौगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह द्वारा विधानसभा में उठाए गए प्रश्न के चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं

मध्य प्रदेश में लगातार बढ़ रहे बाल विवाह के मामलों को लेकर पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि देश की आज़ादी के बाद से ही हर सरकार का प्रयास रहा है कि सामाजिक कुरीतियों को समाप्त किया जाए, जिसमें बाल विवाह एक बड़ा मुद्दा रहा है, लेकिन प्रदेश में स्थिति चिंताजनक होती जा रही है।

अन्य पढ़ें: Hemant Soren-हेमंत सोरेन भाजपा के साथ गठबंधन की अटकलों को नकारे

जयवर्धन सिंह ने विधानसभा में 2020 से 2025 तक के बाल विवाह के मामलों का विवरण मांगा था. सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में हर साल वर्ष बाल विवाह के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

वर्षवार बाल विवाह के मामले (सरकारी आंकड़े)

  • 2020 : 366 मामले
  • 2021 : 436 मामले
  • 2022 : 519 मामले
  • 2023 : 528 मामले
  • 2024 : 529 मामले
  • 2025 : में 538 मामले

इन आंकड़ों का हवाला देते हुए जयवर्धन सिंह ने कहा कि यह बढ़ती संख्या इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि प्रदेश में सामाजिक विकास और सामाजिक उत्थान की दिशा में भाजपा सरकार कार्य नही कर रही है।

कांग्रेस ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार सामाजिक सुधार, शिक्षा और बच्चों के भविष्य पर ध्यान देने में पूर्णतः असफल रही है. उन्होंने कहा कि बच्चों को अच्छी शिक्षा, डिग्री और रोजगार का अवसर देना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन बीजेपी न तो यह कर पा रही है और न ही सामाजिक बुराइयों को रोकने में सफल हो रही है।

सरकार ने क्या दिया जवाब?

महिला बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने जवाब देते हुए कहा बाल विवाह को लेकर पूरी तरह संवेदनशील हैं. लगातार जागरूकता अभियान, प्रचार-प्रसार और निगरानी के माध्यम से ऐसी घटनाओं को रोकने का प्रयास किया जा रहा है।

बाल विवाह कितने साल का होता है?

बाल विवाह कानूनी अपराध है। इस पर दो वर्ष का कठोर कारावास एवं एक लाख रूपये के जुर्माने का प्रावधान है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के अनुसार विवाह के लिये वधू की आयु 18 वर्ष एवं वर की आयु 21 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। इससे कम आयु की शादी बाल विवाह की श्रेणी मे आती है।

अन्य पढ़ें:

Surekha Bhosle

लेखक परिचय

Surekha Bhosle

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।