नई दिल्ली। भारत में ग्रेच्युटी से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। अब कर्मचारियों (Employees) को पांच साल की बजाय कुछ मामलों में सिर्फ एक साल की सेवा के बाद भी ग्रेच्युटी का लाभ मिल सकता है। हालांकि, यह सुविधा सभी कर्मचारियों पर लागू नहीं होगी।
क्या है ग्रेच्युटी और पुराना नियम
ग्रेच्युटी कर्मचारियों को मिलने वाला एक महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ है, जो नौकरी छोड़ने या रिटायरमेंट (Retirement) के समय कंपनी द्वारा दिया जाता है।अब तक के नियमों के अनुसार, किसी कर्मचारी को ग्रेच्युटी पाने के लिए कंपनी में लगातार कम से कम 5 साल काम करना जरूरी था। इस वजह से कई कर्मचारी, जो 4 साल 11 महीने बाद नौकरी छोड़ देते थे, उन्हें यह लाभ नहीं मिल पाता था।
नए नियम से क्या बदला
नए लेबर कोड के तहत इस व्यवस्था में बदलाव किया गया है। अब कॉन्ट्रैक्ट और संविदा (कॉन्ट्रैक्चुअल) कर्मचारियों को भी सिर्फ 1 साल की सेवा के बाद ग्रेच्युटी का लाभ मिल सकता है। यह बदलाव सामाजिक सुरक्षा कानून के तहत लाया गया है, जो बदलते रोजगार के स्वरूप को ध्यान में रखकर किया गया है।
किन कर्मचारियों को मिलेगा फायदा
नए नियम का सबसे बड़ा फायदा उन कर्मचारियों को मिलेगा, जो कम अवधि के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं।
1 से 2 साल के कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को अब नौकरी छोड़ने के बाद भी ग्रेच्युटी मिल सकेगी।
पहले यह लाभ केवल लंबे समय तक नियमित सेवा देने वाले कर्मचारियों तक ही सीमित था।
कैसे होगी ग्रेच्युटी की गणना
इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि एक साल पूरा होते ही पूरी ग्रेच्युटी राशि मिल जाएगी। ग्रेच्युटी का भुगतान कर्मचारी की सेवा अवधि के अनुसार आनुपातिक (प्रो-राटा) आधार पर किया जाएगा। यानी जितनी अवधि तक काम किया है, उसी हिसाब से भुगतान होगा।
वेतन संरचना का भी होगा असर
नए नियम के अनुसार, कर्मचारी के कुल वेतन में कम से कम 50% हिस्सा बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का होना चाहिए।
चूंकि ग्रेच्युटी की गणना इसी आधार पर होती है, इसलिए बेसिक वेतन जितना अधिक होगा, ग्रेच्युटी की राशि भी उतनी ही ज्यादा होगी।
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अब खाली हाथ नहीं लौटेंगे कर्मचारी
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब कम अवधि तक काम करने वाले कर्मचारियों को भी कुछ न कुछ आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी। पहले जहां कई कर्मचारी बिना किसी लाभ के नौकरी छोड़ देते थे, अब उन्हें ग्रेच्युटी के रूप में आर्थिक सहारा मिलेगा।
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