नई दिल्ली। रेलवे में कथित जमीन के बदले नौकरी देने के मामले में राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद (Lalu Prasad Yadav) यादव और उनके परिवार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट पर सुनवाई करते हुए लालू यादव, तेजस्वी यादव, राबड़ी देवी (Rabdi Devi) तेज प्रताप यादव, मीसा भारती, हेमा यादव समेत कुल 40 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है। अदालत ने इस मामले में कुल 103 आरोपियों में से 52 को बरी भी कर दिया है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत ट्रायल आगे बढ़ेगा
अदालत के आदेश के बाद अब लालू परिवार और अन्य आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को छोड़कर अन्य सभी आरोपी व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए।
2004-2009 के दौरान रेल मंत्री रहते हुए हुई कथित धांधली
यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव यूपीए सरकार के कार्यकाल में रेल मंत्री थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच रेलवे में ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिवारजनों से लालू परिवार और उनके करीबियों के नाम पर जमीनें ली गईं।
सीबीआई और ईडी अलग-अलग कर रही जांच
सीबीआई इस मामले में आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोपों की जांच कर रही है, जबकि मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अलग से कर रहा है। सीबीआई का कहना है कि जिन अभ्यर्थियों को नौकरी दी गई, वे बिहार के गरीब तबके से थे और उनके शैक्षणिक दस्तावेज संदिग्ध पाए गए। कई मामलों में फर्जी स्कूल प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्तियां हुईं।
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अब गवाहों और सबूतों के आधार पर ट्रायल
सीबीआई ने आरोपपत्र में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी लगाई हैं। अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद अब इस बहुचर्चित मामले में गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर सुनवाई होगी। राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से अहम माने जा रहे इस फैसले के बाद आने वाले दिनों में लालू परिवार की कानूनी लड़ाई और तेज होने की संभावना है।
चारा घोटाला का मुख्य आरोपी कौन था?
पशुओं को खिलाये जाने वाले चारे के नाम से सरकारी खजाने का पैसा का गबन किया गया। चारा घोटाले में दोषी पाये जाने वाले लोगों में लालू प्रसाद यादव सबसे प्रमुख व्यक्ति हैं। लोकसभा में प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी द्वारा इस मुद्दे को उठाया गया और सीबीआई जाँच की माँग की गयी।
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