Delhi Blast : दिल्ली ब्लास्ट में इस्तेमाल हुआ ‘Mother of Satan’?

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Delhi blast case investigation
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Delhi-blast : दिल्ली में एक हफ्ते पहले हुए भीषण धमाके में बेहद खतरनाक और अस्थिर विस्फोटक TATP (Triacetone Triperoxide) के इस्तेमाल की आशंका गहराती जा रही है। यह वही रसायन है जिसे उसकी अत्यधिक संवेदनशीलता और मामूली गर्मी या दबाव में फट जाने की क्षमता के कारण दुनिया भर में ‘Mother of Satan’ के नाम से जाना जाता है। जांच एजेंसियां अब विस्फोट स्थल से मिले रासायनिक अवशेषों की जांच कर रही हैं, ताकि यह पुष्टि की जा सके कि क्या वास्तव में यही घातक पदार्थ धमाके की वजह था।

शुरुआत में पुलिस को शक था कि रेड फोर्ट के पास 10 नवंबर को खड़ी i20 कार में अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल किया गया था। लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ अधिकारियों को लगा कि धमाके की प्रकृति और नुकसान TATP जैसा ही लगता है। इस कार को उमर मोहम्मद चला रहा था, (Delhi-blast) जिस पर पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से संबंध होने का आरोप है। कार फटने से 13 लोगों की मौत हो गई और लगभग दो दर्जन घायल हुए।

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जांच अधिकारियों का मानना है कि उमर को TATP की खतरनाक प्रकृति के बारे में जानकारी थी, फिर भी वह इसे भीड़भाड़ वाले इलाकों से लेकर गुज़रा। घटना स्थल चांदनी चौक के पास था, जहां दिनभर भारी भीड़ रहती है। TATP की संवेदनशीलता पर विशेषज्ञ बताते हैं कि यह मामूली रगड़, तापमान में वृद्धि या किसी भी भौतिक बदलाव से अस्थिर होकर तेज़ धमाका कर सकता है। इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि इसे फटने के लिए किसी डेटोनेटर की आवश्यकता नहीं होती।

यह विस्फोटक पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय आतंकी हमलों में मिल चुका है—2017 बार्सिलोना हमला, 2015 पेरिस हमले, 2017 मैनचेस्टर बम धमाका और 2016 ब्रसेल्स ब्लास्ट—जहां आतंकियों ने इसी रसायन का इस्तेमाल किया था। ऐसे हमलों के बाद इसे तैयार करने वाले लोगों को किसी न किसी प्रकार का आतंकी प्रशिक्षण मिला होता है।

दिल्ली धमाके की जगह पर हुए नुकसान का पैटर्न भी TATP से मेल खाता है, क्योंकि यह ज़ोरदार शॉकवेव पैदा करता है। विशेषज्ञ यह भी जांच रहे हैं कि क्या यह विस्फोट अनजाने में हुआ या किसी बड़ी आतंकी योजना के लिए ले जाते समय TATP अस्थिर होकर कार के भीतर ही फट गया। अब जांच टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि उमर ने TATP तैयार करने के लिए जरूरी रसायन कहां से जुटाए और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था। उसके डिजिटल रिकॉर्ड, संपर्क और लोकेशन डेटा को भी खंगाला जा रहा है।

10 नवंबर की घटनाओं को जोड़कर देखने पर पता चला कि उमर विस्फोट से पहले पुरानी दिल्ली की कई तंग और भीड़भाड़ वाली गलियों में लंबे समय तक घूमता रहा। अगर (Delhi Blast) TATP की पुष्टि होती है, तो यह भी जांच का बड़ा सवाल है कि इतना अस्थिर रसायन कई घंटों तक कार के भीतर कैसे स्थिर रहा और क्या किसी बाहरी वजह से यह अचानक फट गया।

इस केस में उमर के साथ अलीगढ़ फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी के तीन डॉक्टर—शाहीन सईद, मुअज्जमिल शकील और आदिल राठर—को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस को शक है कि यह सभी मिलकर एनसीआर में बड़े पैमाने पर सीरियल ब्लास्ट की साजिश रच रहे थे। उनके ठिकानों से करीब 3,000 किलो विस्फोटक, बम बनाने की सामग्री, एक रायफल और भारी मात्रा में गोलाबारूद बरामद हुआ है। सईद की हालिया पासपोर्ट वेरिफिकेशन से यह भी संकेत मिला है कि वह देश छोड़कर भागने की योजना बना रही थी।

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Sai Kiran

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