नई दिल्ली। लाल किले के पास हुए कार धमाके को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। सरकार ने इसे ‘आतंकी घटना’ बताया है। जांच में सामने आया है कि विस्फोटकों से लदी कार चला रहे डॉ. उमर नबी (Dr Umar Nabi) ने 6 दिसंबर, बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी के दिन, दिल्ली में बड़ा धमाका करने की योजना बनाई थी।
तुर्की यात्रा से शुरू हुई कट्टरता
जांच में शामिल अधिकारियों के अनुसार, उमर और उसके सहयोगी डॉ. मुजम्मिल गनी ने 2021 में तुर्की की यात्रा के दौरान प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (Jaish E Mohmmad) के सदस्यों से मुलाकात की थी।
इस यात्रा के बाद दोनों में कट्टरपंथी विचारधारा पनपी और उन्होंने देश में आतंकी साजिश रचनी शुरू की।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी बना अड्डा
अधिकारियों ने बताया कि फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी में शिक्षक मुजम्मिल गनी की गिरफ्तारी ने इस साजिश को नाकाम कर दिया। गनी और उमर ने मिलकर अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर जैसे विस्फोटक इकट्ठा किए और उन्हें अल-फलाह परिसर में जमा किया।
कार में आईईडी असेंबल कर बना रहा था बम
जांच में यह भी सामने आया कि उमर ने इंटरनेट से वाहन-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (VBIED) तैयार करने की जानकारी हासिल की थी। वह धमाके से पहले करीब तीन घंटे एक मस्जिद में छिपा रहा और फिर कार लेकर बाहर निकला।
हैंडलर ने दिया था पूरे भारत में फैलने का आदेश
एजेंसियों के मुताबिक, उमर और मुजम्मिल को निर्देश मिले थे कि वे अपने मॉड्यूल को देशभर में सक्रिय करें। दोनों के पासपोर्ट रिकॉर्ड से पता चला कि तुर्की यात्रा के बाद वे टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिये जैश हैंडलर्स से जुड़े थे। इन ग्रुप्स में से एक को पाकिस्तान स्थित उमर बिन खत्ताब नामक व्यक्ति चला रहा था।
फोरेंसिक जांच से खुलेंगे और राज
धमाके में इस्तेमाल कार के हिस्सों को जांच के लिए रोहिणी स्थित फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) भेजा गया है। एफएसएल, सीबीआई और एनआईए की टीमें विस्फोटक सामग्री के अवशेषों की जांच कर रही हैं।
अब तक 200 से अधिक नमूने जुटाए जा चुके हैं, जिनसे यह तय होगा कि धमाके में किस तरह का विस्फोटक प्रयोग हुआ।
Read More :