National- भारत बना दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी सैन्य ताकत, रक्षा बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

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सैन्य ताकत
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नई दिल्ली,। साल 2025 में वैश्विक रक्षा समीकरणों में भारत ने अपनी स्थिति और मजबूत की है। (Stockholm International Peace Research Institute) (सिपरी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, India अब दुनिया भर में अपनी सेनाओं पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाले देशों की सूची में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। पिछले वर्ष दुनिया के कुल सैन्य खर्च में भारत की हिस्सेदारी 3.2 प्रतिशत दर्ज की गई है।

रक्षा बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

बता दें कि भविष्य की चुनौतियों और ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के अनुभवों को देखते हुए, भारत सरकार ने 2026-27 के केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इसमें 2.19 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत परिव्यय शामिल है, जिसका उपयोग नए लड़ाकू विमान, पनडुब्बियां, मिसाइलें और ड्रोन सिस्टम खरीदने के लिए किया जाएगा।

वैश्विक सूची में भारत की स्थिति मजबूत

रिपोर्ट के मुताबिक, United States, China, Russia और (Germany) इस सूची में क्रमशः पहले चार स्थानों पर काबिज हैं। 2025 में भारत का कुल सैन्य खर्च 92.1 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.9 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है।

ऑपरेशन सिंदूर का असर

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण पिछले साल Pakistan के खिलाफ चलाया गया ऑपरेशन सिंदूर था। इस अभियान के दौरान सशस्त्र बलों को युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार रखने हेतु आपातकालीन आधार पर हथियारों और साजो-सामान की बड़े पैमाने पर खरीद की गई थी।

पड़ोसी देशों का हाल

पड़ोसी देशों की बात करें तो चीन 336 अरब डॉलर के रक्षा बजट के साथ दूसरे स्थान पर है। वहीं, आर्थिक संकटों से जूझ रहा पाकिस्तान 11.9 अरब डॉलर के खर्च के साथ वैश्विक सूची में 31वें स्थान पर है। वैश्विक स्तर पर कुल सैन्य खर्च 2,887 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिसमें अकेले अमेरिका, चीन और रूस की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत है।

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रक्षा रणनीति में बदलाव

India अपनी रक्षा रणनीति में अब बदलाव ला रहा है। यद्यपि भारत अभी भी सैन्य हार्डवेयर का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आयातक बना हुआ है, लेकिन रूस पर इसकी निर्भरता कम हो रही है। सिपरी के आंकड़ों के अनुसार, 2011-15 में भारत के कुल आयात में रूस की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 40 प्रतिशत रह गई है। भारत अब France, Israel और United States जैसे देशों से आधुनिक तकनीक हासिल कर रहा है।

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Anuj Kumar

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