Breaking News: India: न्यायिक व्यवस्था: विकसित भारत की राह में बाधा

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पीएम सलाहकार संजीव सान्याल

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC) के सदस्य संजीव सान्याल ने हाल ही में कहा है कि भारत(India) के लिए एक विकसित राष्ट्र बनने की राह में उसकी न्यायिक व्यवस्था सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने दिल्ली में भारतीय(India) महाधिवक्ता(Advocate General) के सम्मेलन में बोलते हुए कई मुद्दों पर सवाल उठाए। सान्याल ने कहा कि देश में कानून और न्याय को समय पर लागू नहीं किया जा रहा है, जिससे वास्तविक विकास बाधित हो रहा है। उन्होंने अदालतों में ‘माई लॉर्ड’ जैसे औपनिवेशिक शब्दों के इस्तेमाल और महीनों तक चलने वाली छुट्टियों पर भी आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि न्यायपालिका भी एक सार्वजनिक सेवा है, जिसे लंबे समय तक बंद नहीं रखा जाना चाहिए, ठीक उसी तरह जैसे पुलिस विभाग या अस्पतालों को बंद नहीं किया जाता

कानून की जटिलता और 99-1 की समस्या

सान्याल ने भारत(India) की कानूनी प्रणाली की एक बड़ी समस्या, जिसे उन्होंने ’99-1 की समस्या’ कहा, पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि केवल 1% लोग ही नियमों का गलत इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इस 1% को रोकने के लिए सरकार ऐसे जटिल नियम बनाती है कि बाकी के 99% ईमानदार लोग भी इन नियमों में फंस जाते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि लोगों को अदालतों पर भरोसा नहीं है कि वे ऐसे मामलों को जल्दी सुलझा पाएंगी। इसी तरह, उन्होंने मुकदमे से पहले अनिवार्य मध्यस्थता के नियम पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हालांकि यह नियम अच्छे इरादे से लाया गया था, लेकिन मुंबई की अदालतों के आंकड़े बताते हैं कि 98-99% मामलों में यह असफल रहा, जिससे केस कोर्ट में तो जाते ही हैं, पर उनमें 6 महीने का अतिरिक्त समय बर्बाद हो जाता है।

कानूनी प्रणाली की सोच और संस्कृति में बदलाव की जरूरत

सान्याल का मानना है कि भारत(India) की कानूनी व्यवस्था में केवल प्रक्रियागत समस्याएं ही नहीं हैं, बल्कि सोच और संस्कृति की भी समस्या है। उन्होंने वकालत के मध्ययुगीन ढांचे की आलोचना की, जिसमें सीनियर एडवोकेट और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड जैसी कई परतें हैं। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में इतनी परतें अनावश्यक हैं। सान्याल ने यह भी सुझाव दिया कि कई मामलों में कानूनी डिग्री की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए, क्योंकि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकें भी कानूनी सहायता प्रदान कर सकती हैं। उनकी टिप्पणियां ‘2047 में विकसित भारत के लिए भारत(India) के कानूनी आधार की पुनर्कल्पना’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन के उद्देश्य के अनुरूप थीं, जो देश की कानूनी प्रणाली में बड़े बदलावों की आवश्यकता पर जोर देती हैं।

संजीव सान्याल ने ’99-1 की समस्या’ से क्या मतलब समझाया?

संजीव सान्याल ने ’99-1 की समस्या’ से यह मतलब समझाया कि देश में केवल 1% लोग ही नियमों का गलत इस्तेमाल करते हैं, लेकिन क्योंकि सरकार को भरोसा नहीं है कि अदालतें इन मामलों को जल्दी सुलझा पाएंगी, वह ऐसे जटिल नियम बनाती है जो 99% ईमानदार लोगों को भी अनावश्यक रूप से परेशान करते हैं।

सान्याल ने अदालतों में छुट्टियों और ‘माई लॉर्ड’ जैसे शब्दों पर क्या आपत्ति जताई?

सान्याल ने कहा कि अदालतें एक सार्वजनिक सेवा हैं, और उन्हें पुलिस या अस्पतालों की तरह महीनों तक बंद नहीं रखा जा सकता। उन्होंने ‘माई लॉर्ड’ जैसे शब्दों पर भी आपत्ति जताई, जिन्हें अंग्रेजों के जमाने का बताते हुए इन्हें बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया, क्योंकि यह औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है।

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Dhanarekha

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