नई दिल्ली,। मिडिल ईस्ट (Middile East) में जंग जारी है। इसी बीच भारत ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। भारत ने पहली बार अपनी अगली पीढ़ी की एयर डिफेंस ताकत की झलक दुनिया को दिखाई। यह सिर्फ एक सिस्टम नहीं है, बल्कि एक संदेश है कि आने वाले समय में भारत आसमान की जंग में भी पीछे नहीं रहेगा।
‘कुशा’ का पहला सफल परीक्षण, दुनिया की नजरें भारत पर
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) ने अपने स्वदेशी लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस सिस्टम ‘प्रोजेक्ट कुशा’ का पहला परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इसे आधिकारिक तौर पर एक्सटेंडेड रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (ERADS) कहा जा रहा है और इसे एस-400 जैसे सिस्टम के बराबर माना जा रहा है। करीब 21,700 करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट भारत के सबसे अहम सैन्य और नागरिक ठिकानों को अभेद सुरक्षा कवच देने के लिए तैयार किया जा रहा है।
तीन लेयर वाली सुरक्षा ढाल, हर खतरे का जवाब
इस सिस्टम की असली ताकत इसके तीन-स्तरीय डिफेंस में छिपी है। पहला M1 इंटरसेप्टर 150 किमी की रेंज के साथ फाइटर जेट्स और प्रिसिजन वेपंस को हवा में ही खत्म कर सकता है। दूसरा M2 इंटरसेप्टर 350 किमी रेंज और AESA रडार के साथ और ज्यादा सटीक व घातक है।
तीसरा M3 इंटरसेप्टर 350-400 किमी रेंज के साथ (AWACS) जैसे हाई वैल्यू टारगेट और बैलिस्टिक मिसाइल तक को निशाना बना सकता है। यानी यह एक मल्टी-लेयर शील्ड है, जो दुश्मन के किसी भी हवाई हमले को अलग-अलग स्तर पर रोकने में सक्षम है।
2026 से 2030 तक पूरा होगा नेटवर्क
रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पास स्टेल्थ फाइटर, क्रूज मिसाइल, ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल—हर खतरे का जवाब तैयार किया जा रहा है। टाइमलाइन भी तय है—2026 में फ्लाइट टेस्ट शुरू होंगे, 2028 तक शुरुआती तैनाती और 2030 तक पूरा ऑपरेशनल नेटवर्क तैयार करने का लक्ष्य है। भारतीय वायुसेना पहले ही कई स्क्वाड्रनों की जरूरतों को मंजूरी दे चुकी है।
‘मिशन सुदर्शन चक्र’ का अहम हिस्सा
यह सिस्टम ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य 2035 तक पूरे भारत में एक इंटीग्रेटेड एयर और मिसाइल डिफेंस नेटवर्क तैयार करना है। इसमें आकाश, एमडी और अन्य बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम एक साथ काम करेंगे।
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क्या S-400 से भी आगे निकल जाएगा भारत?
अब सवाल यह है कि क्या ‘कुशा’ भारत का अपना एस-400 है या उससे भी आगे की तैयारी?
जब दुनिया मिडिल ईस्ट की जंग में एयर डिफेंस की असली परीक्षा देख रही है, उसी वक्त भारत अपने भविष्य की सुरक्षा को मजबूत करने में जुटा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि इस जंग से मिलने वाले हर ऑपरेशनल और तकनीकी सबक को भारत अपनी रणनीति में शामिल करेगा। यह सिर्फ एक परीक्षण नहीं, बल्कि संकेत है कि आने वाले समय में भारत आसमान में अपनी पकड़ और मजबूत करने जा रहा है।
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