Thiruparankundram controversy : मद्रास हाईकोर्ट जज पर महाभियोग क्यों? जानिए थिरुप्परंकुंदरम विवाद…

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Thiruparankundram controversy
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Thiruparankundram controversy : कार्तिगई दीपम दीपक कहां जलाया जाए—इस सवाल से शुरू हुआ थिरुप्परंकुंदरम विवाद अब न्यायपालिका, सरकार, राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों के बीच टकराव का बड़ा मुद्दा बन गया है।

डीएमके सांसद मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की योजना बना रहे हैं। वजह है उनका वह आदेश, जिसने तमिलनाडु में राजनीतिक और कानूनी भूचाल ला दिया।

क्या था कोर्ट का आदेश?

जस्टिस स्वामीनाथन ने आदेश दिया कि 4 दिसंबर को शाम 6 बजे तक थिरुप्परंकुंदरम के “दीपथून” नामक स्थान पर कार्तिगई दीपम जलाया जाए। यह स्थान सिकंदर बादुशा दरगाह के पास स्थित है और लंबे समय से संवेदनशील माना जाता रहा है।

परंपरागत रूप से दीपक (Thiruparankundram controversy) पहाड़ी पर स्थित उचिपिल्लैयार मंदिर के पास दीप मंडप में जलाया जाता है। हालांकि, चार याचिकाकर्ताओं की मांग पर अदालत ने दीपथून में दीपक जलाने की अनुमति दी।

न्यायाधीश ने कहा कि इससे दरगाह या मुस्लिम समुदाय के अधिकार प्रभावित नहीं होंगे, लेकिन ऐसा न करना मंदिर की भूमि पर अतिक्रमण के खतरे को बढ़ा सकता है।

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सरकार ने आदेश क्यों नहीं माना?

तमिलनाडु सरकार ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताते हुए अदालत के आदेश को लागू करने से इनकार कर दिया।

डीएमके क्या कह रही है?

  • डीएमके का कहना है कि यह आदेश 2017 में मद्रास हाईकोर्ट (Thiruparankundram controversy) की डिवीजन बेंच के फैसले के खिलाफ है।
  • विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले यह फैसला सांप्रदायिक तनाव बढ़ा सकता है।
  • लोकसभा में डीएमके सांसद टी.आर. बालू ने भाजपा पर तमिलनाडु में धार्मिक तनाव भड़काने का आरोप भी लगाया।

जमीनी स्तर पर क्या हुआ?

4 दिसंबर को हिंदू मक्कल कच्ची, हिंदू तमिझर कच्ची, हनुमान सेना और हिंदू मुन्नानी जैसे संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पहाड़ी पर चढ़कर दीपक जलाने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें रोका, जिसके बाद झड़पें हुईं।

दीपक न जलाए जाने से मंदिर परिसर के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

अब सुप्रीम कोर्ट में मामला

तमिलनाडु सरकार द्वारा हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। अब इस संवेदनशील विवाद पर अंतिम फैसला शीर्ष अदालत करेगी।

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Sai Kiran

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