मौलाना मदनी ने कहा कि वक्फ संपत्तियां मुसलमानों के धार्मिक और सांस्कृतिक अस्तित्व का अहम हिस्सा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस विधेयक के माध्यम से वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण स्थापित करना चाहती है, जो शरीयत के खिलाफ है। उनका कहना है कि यह विधेयक मुसलमानों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर रहा है।
वक्फ विधेयक: एक असंवैधानिक कदम
मौलाना मदनी ने स्पष्ट किया कि यह विधेयक वक्फ की मूल प्रकृति और वाकिफ (वक्फ करने वाले) की मंशा को बदलने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह केवल मुसलमानों का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के संविधान और धर्मनिरपेक्षता का भी सवाल है। उनका कहना है कि यदि यह विधेयक पारित होता है, तो जमीयत उलेमा-ए-हिंद की सभी राज्य इकाइयां इसे उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगी।
संघर्ष की दिशा: संविधान और शरीयत की रक्षा
मौलाना मदनी ने कहा कि यह संघर्ष केवल वक्फ संपत्तियों की रक्षा का नहीं, बल्कि संविधान और शरीयत की रक्षा का है। उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि वे इस संघर्ष में एकजुट होकर शामिल हों, ताकि उनकी धार्मिक और संवैधानिक पहचान की रक्षा की जा सके।
अपील: विरोध प्रदर्शन में भागीदारी
मौलाना मदनी ने 13 मार्च को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन मुसलमानों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, और इसमें भाग लेकर लोग अपनी एकजुटता और प्रतिबद्धता दिखा सकते हैं।
मौलाना अरशद मदनी का यह बयान वक्फ विधेयक के खिलाफ मुसलमानों की एकजुटता और संघर्ष की दिशा को स्पष्ट करता है। उनका कहना है कि यह विधेयक केवल एक कानून नहीं, बल्कि मुसलमानों की धार्मिक और संवैधानिक पहचान पर हमला है, जिसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।