नई दिल्ली । देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान, दिल्ली एम्स (Delhi Aiims) ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अब एम्स में 10 लाख रुपये तक की महंगी और जटिल सर्जरी पूरी तरह मुफ्त कर दी गई है। इस नई व्यवस्था के तहत मरीज या उनके परिजनों से इलाज के लिए एक रुपया भी नहीं लिया जा रहा है।
₹10 लाख तक की सर्जरी अब बिना शुल्क
इस फैसले के बाद वे ऑपरेशन, जिनके लिए मरीजों को पहले निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता था या भारी खर्च उठाना पड़ता था, अब एम्स में पूरी तरह मुफ्त किए जा रहे हैं। इससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिली है।
रोबोटिक सर्जरी में एम्स ने रचा इतिहास
मुफ्त इलाज के साथ-साथ दिल्ली एम्स ने तकनीक के क्षेत्र में भी देश भर में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। एम्स के सर्जिकल विभाग ने महज 13 महीनों में 1000 रोबोटिक सर्जरी (Robotic Surgery) सफलतापूर्वक पूरी कर रिकॉर्ड बनाया है।
देश के अन्य अस्पतालों से आगे निकला एम्स
मंगलवार को जानकारी देते हुए सर्जिकल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील चुम्बर ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी के मामले में एम्स अब देश के सभी अस्पतालों से आगे निकल चुका है।
कोविड काल से अब तक रोबोटिक तकनीक में बड़ा विस्तार
डॉ. चुम्बर ने बताया कि कोविड-19 के दौर में जहां देश में केवल 2–3 रोबोटिक सिस्टम थे, वहीं आज भारत में इनकी संख्या 200 से अधिक हो चुकी है।
पहली रोबोटिक सर्जरी से 1000 तक का सफर
सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. हेमांग भट्टाचार्य, जिन्होंने एम्स में पहली रोबोटिक सर्जरी की थी, ने बताया कि नवंबर 2024 में पहला रोबोट आने के बाद डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। एम्स को सबसे तेज पहली 100 रोबोटिक सर्जरी करने का भी गौरव प्राप्त हुआ था।
किन बीमारियों में हो रही है रोबोटिक सर्जरी
विशेषज्ञों के अनुसार, पेट, लीवर (Liver) पित्ताशय, कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट, थायरॉइड और पैंक्रियाज जैसी जटिल बीमारियों के ऑपरेशन अब रोबोटिक तकनीक से किए जा रहे हैं।
कम दर्द, कम संक्रमण और तेज रिकवरी
डॉ. सुनील चुम्बर ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी में बड़ा चीरा नहीं लगाया जाता, जिससे संक्रमण का खतरा कम होता है। कम रक्तस्राव, कम दर्द और जल्दी रिकवरी इसके प्रमुख फायदे हैं, जिससे मरीजों को जल्द अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है।
इमरजेंसी में अब भी पारंपरिक सर्जरी
हालांकि डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि इमरजेंसी मामलों में फिलहाल पारंपरिक सर्जरी ही की जाती है, क्योंकि रोबोटिक प्रक्रिया के लिए समय और पूर्व तैयारी जरूरी होती है।
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गरीब और मध्यम वर्ग के लिए बड़ी राहत
एम्स की यह पहल देश के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रही है।
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