30 साल बाद शिवसेना के हाथ से फिसल सकती है मेयर की कुर्सी
मुंबई: मुंबई(Mumbai) के चुनावी इतिहास में पहली बार भारतीय जनता पार्टी अपना मेयर बनाने की दहलीज पर खड़ी है। ताज़ा रुझानों के अनुसार, 227 सीटों वाली बीएमसी में भाजपा नीत गठबंधन 118 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जिसमें अकेले भाजपा 90 सीटों पर आगे है। यदि ये रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो यह 1992 से चले आ रहे शिवसेना के 30 साल के निर्बाध शासन का अंत होगा। आजादी के बाद से मुंबई में केवल कांग्रेस(Congress) और शिवसेना का ही दबदबा रहा है, ऐसे में भाजपा का यह प्रदर्शन राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।
मेयर की शक्तियाँ और चुनाव की जटिल प्रक्रिया
मुंबई में मेयर(Mumbai) का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं, बल्कि चुनकर आए 227 पार्षदों (नगरसेवकों) द्वारा किया जाता है। मेयर(Mayor) का कार्यकाल 2.5 साल का होता है, जबकि पार्षदों का कार्यकाल 5 साल का होता है। हालांकि मेयर पद का महत्व बहुत अधिक है और वे निगम की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं, लेकिन प्रशासनिक शक्तियां मुख्य रूप से नगर आयुक्त (कमिश्नर) के पास होती हैं, जो एक IAS अधिकारी होते हैं। मेयर शहर के ‘प्रथम नागरिक’ के रूप में एक औपचारिक और गरिमामय पद है, जो शहर के विकास की नीतियों में महत्वपूर्ण प्रभाव रखता है।
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एशिया की सबसे बड़ी सिविक बॉडी का विशाल बजट
BMC का चुनाव सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि आर्थिक ताकत का भी खेल है। बीएमसी का वार्षिक बजट लगभग 74,000 करोड़ रुपए है, जो भारत के कई छोटे राज्यों जैसे गोवा, सिक्किम और मणिपुर के कुल बजट से भी बड़ा है। पिछले चार सालों से चुनाव न होने के कारण यहाँ प्रशासक का शासन था, लेकिन अब इस विशाल(Mumbai) बजट और संसाधनों पर नियंत्रण पाने की होड़ मची है। शिवसेना के बंटवारे के बाद यह पहला बड़ा चुनाव है, जो यह तय करेगा कि ‘असली मुंबई’ पर किसका नियंत्रण होगा।
मुंबई मेयर का चुनाव कैसे होता है और इसका कार्यकाल कितना होता है?
मुंबई में 227 वार्डों से पार्षद (नगरसेवक) चुनकर आते हैं। ये निर्वाचित पार्षद मिलकर अपने बीच से मेयर(Mumbai) का चुनाव करते हैं। जिस पार्टी या गठबंधन के पास बहुमत (114+ सीटें) होता है, उसी का मेयर चुना जाता है। मेयर का कार्यकाल 2.5 साल का होता है, जिसके बाद पुनः चुनाव होता है।
बीएमसी चुनाव को ‘राज्यों के बजट’ से तुलना क्यों की जाती है?
बीएमसी एशिया की सबसे अमीर नगर पालिका है। इसका बजट (₹74,000 करोड़) इतना विशाल है कि यह उत्तर-पूर्व के कई राज्यों और गोवा जैसे राज्यों के संचयी बजट से भी अधिक है। इसी वित्तीय शक्ति के कारण बीएमसी पर नियंत्रण को राष्ट्रीय राजनीति में भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
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