Jawaharlal Nehru letters : भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज़ों और पत्रों को लेकर केंद्र सरकार ने अहम बयान दिया है। सरकार ने साफ कहा है कि ये दस्तावेज़ किसी एक परिवार या व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि देश की ऐतिहासिक धरोहर हैं।
बताया गया कि वर्ष 1971 में इंदिरा गांधी ने सुरक्षा के उद्देश्य से नेहरू के निजी पत्र, कार्टून और अन्य दस्तावेज़ नेहरू मेमोरियल म्यूज़ियम एंड लाइब्रेरी को सौंपे थे। हालांकि, 2008 में यूपीए सरकार के दौरान सोनिया गांधी के निर्देश पर करीब 51 बक्सों में रखे गए इन दस्तावेज़ों को उनके आवास पर ले जाया गया।
इन पत्रों में एडविना माउंटबेटन, वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन और समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तियों के साथ नेहरू के पत्राचार शामिल बताए जाते हैं। केंद्र सरकार का कहना है कि भले ही ये निजी पत्र हों, लेकिन प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए लिखे जाने के कारण इनका राष्ट्रीय महत्व है।
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केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि (Jawaharlal Nehru letters) एक बार सरकारी संस्था को सौंपे गए दस्तावेज़ों को वापस लेना कानून के खिलाफ है। सरकार ने चिंता जताई कि ये दस्तावेज़ शोधकर्ताओं और इतिहासकारों के लिए उपलब्ध होने चाहिए, लेकिन फिलहाल उनकी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
इस मुद्दे पर संसद में बहस के दौरान कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने “दस्तावेज़ गायब” होने की बात पर आपत्ति जताई और सरकार से माफी की मांग की। सरकार ने जवाब में कहा कि दस्तावेज़ गायब नहीं हुए हैं, बल्कि सोनिया गांधी के पास हैं और उन्हें वापस सौंपने की मांग की जा रही है।
अब ‘प्राइम मिनिस्टर्स म्यूज़ियम एंड लाइब्रेरी’ (PMML) के नाम से जानी जाने वाली संस्था ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को दस्तावेज़ लौटाने के लिए पत्र भेजे हैं। सूत्रों के मुताबिक, यदि दस्तावेज़ वापस नहीं किए गए तो कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
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