कोलकाता। साल 2001 के बाद यह पहला मौका है जब पश्चिम बंगाल (West Bengal) में निपाह वायरस के संदिग्ध मामले सामने आए हैं। जानलेवा निपाह वायरस (Nipah Virus) के दो संदिग्ध मामले सामने आने के बाद केंद्र सरकार अलर्ट हो गई है। संदिग्ध मामलों के बाद केंद्र ने एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम को बंगाल भेजा है। इससे पहले स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को बताया कि एम्स कल्याणी में 11 जनवरी को वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई।
केंद्र सरकार अलर्ट, विशेषज्ञ टीम रवाना
मुख्य सचिव ने आश्वासन दिया कि यह सुनिश्चित करने के लिए कड़ी सतर्कता बरती जा रही है कि संपर्क में आने से कोई और व्यक्ति संक्रमित न हो।
तीन जिलों में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और जांच
फिलहाल उत्तर 24 परगना, पूर्व बर्धमान और नदिया जिलों में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग (Contract Trasing) और जांच की जा रही है। इसमें उन स्थानों की पहचान भी शामिल है, जहां दोनों नर्सें कार्यरत थीं और जिन इलाकों में उन्होंने यात्रा की थी। राज्य सरकार ने आपात स्थिति के लिए तीन हेल्पलाइन नंबर भी सक्रिय किए हैं।
नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम सक्रिय
केंद्र द्वारा भेजी गई टीम में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत वन्यजीव प्रभाग के विशेषज्ञ शामिल हैं। वायरस की उच्च मृत्यु दर और जूनोटिक प्रकृति को देखते हुए विशेष संक्रमण रोकथाम और नियंत्रण प्रोटोकॉल अपनाए गए हैं।
दोनों संदिग्ध नर्सें, अस्पताल में भर्ती
राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि दोनों संदिग्ध मामले अस्पताल की नर्सों से जुड़े हैं और दोनों उसी अस्पताल में इलाजरत हैं, जहां वे कार्यरत थीं। राज्य सरकार स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है।
संक्रमण के स्रोत की तलाश जारी
मुख्य सचिव ने बताया कि यह पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं कि दोनों नर्सें निपाह वायरस से कैसे संक्रमित हुईं। हाल के दिनों में उनके संपर्क में आए सभी लोगों की पहचान और जांच की जा रही है। जानकारी के अनुसार दोनों नर्सें कुछ दिन पहले बर्धमान गई थीं, वहां भी जांच की जा रही है।
कितना खतरनाक है निपाह वायरस
निपाह वायरस (एनआईवी) मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों (फ्लाइंग फॉक्स) से फैलता है। यह सूअरों और कुछ अन्य घरेलू जानवरों से भी मनुष्यों में फैल सकता है। मानव से मानव में संक्रमण के मामले भी सामने आ चुके हैं।
उच्च मृत्यु दर, इलाज और टीका नहीं
यह संक्रमण गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है, जिसमें एन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क की सूजन) शामिल है। इसकी मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत तक बताई जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल निपाह वायरस के लिए कोई विशेष दवा या टीका उपलब्ध नहीं है।
संक्रमण रोकथाम के लिए सख्त उपाय जरूरी
वायरस को फैलने से रोकने के लिए सख्त संक्रमण नियंत्रण उपाय, सुरक्षात्मक उपकरणों का उपयोग, सतहों का कीटाणुशोधन और प्रकोप वाले क्षेत्रों से दूर रहना बेहद जरूरी है। शुरुआती लक्षण सामान्य होने के कारण पहचान चुनौतीपूर्ण होती है, लेकिन तंत्रिका संबंधी लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज लेना बेहद आवश्यक है।
निपाह वायरस क्या है?
निपाह वायरस को दुनिया के सबसे खतरनाक ज़ूनोटिक वायरसों में गिना जाता है, क्योंकि यह तेजी से फैल सकता है और इसकी मृत्यु दर भी काफी ज्यादा मानी जाती है. ऐसे में किसी भी संभावित आउटब्रेक को शुरुआती स्तर पर ही रोकना बेहद जरूरी हो जाता है.
निपाह वायरस किस देश में है?
दस देशों ( ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, कंबोडिया, चीन, भारत, इंडोनेशिया, मेडागास्कर, पापुआ न्यू गिनी, ताइवान और थाईलैंड ) ने हेनिपावायरस (निपाह या इससे निकटता से संबंधित हेंड्रा वायरस) के प्रकोप की सूचना दी है, या प्टेरोपस चमगादड़ों में सीरोलॉजिकल साक्ष्य या आणविक पहचान के आधार पर जोखिम में हैं (सीडीसी, यूएसए, 2018)।
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