लखनऊ। रेलवे कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल (Digital) और आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब देशभर के 128 रेलवे अस्पतालों और 582 हेल्थ यूनिट्स में इलाज पूरी तरह पेपरलेस होगा। ‘यूएमआईडी’ कार्ड और एचएमआईएस ऐप के जरिए मरीजों को सभी मेडिकल सुविधाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेंगी।
UMID कार्ड से आसान होगी पहचान
रेलवे बोर्ड ने निर्देश जारी कर कहा है कि इलाज, दवा वितरण और रेफरल की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल किया जाए। मरीजों को सिर्फ अपना (UMID) (उम्मीद) कार्ड दिखाना होगा, जिससे उनकी पूरी मेडिकल जानकारी सिस्टम में उपलब्ध हो जाएगी।
ऐप पर उपलब्ध होगी पूरी मेडिकल हिस्ट्री
एचएमआईएस ऐप पर मरीजों की पूरी मेडिकल हिस्ट्री दर्ज रहेगी। इसमें डॉक्टर की सलाह, दवाएं, लैब रिपोर्ट, अपॉइंटमेंट और रेफरल से जुड़ी जानकारी शामिल होगी। इससे मरीज देश के किसी भी रेलवे अस्पताल में आसानी से इलाज जारी रख सकेंगे।
तेजी से बढ़ रहा डिजिटल कवरेज
रेलवे बोर्ड के अनुसार करीब 90 प्रतिशत कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके आश्रितों के UMID कार्ड बन चुके हैं। इस यूनिक आईडी के जरिए मोबाइल पर ऐप डाउनलोड कर सेवाओं का लाभ लिया जा सकता है।
डिजिटल रेफरल और कैशलेस सुविधा
सामान्य स्थिति में मरीज सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में UMID और (OTP) सत्यापन के जरिए इलाज करा सकेंगे। वहीं आपात स्थिति में बिना रेफरल भी इलाज शुरू कराया जा सकेगा। 70 वर्ष से अधिक उम्र के मरीजों को कैशलेस ओपीडी और जांच की सुविधा भी मिलेगी।
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गंभीर बीमारियों में भी मिलेगा लाभ
कैंसर और ट्रांसप्लांट जैसे गंभीर मामलों में भी डिजिटल रेफरल प्रणाली लागू की गई है। इससे मरीजों को बार-बार कागजी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा और इलाज में देरी नहीं होगी।
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