नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने नारी शक्ति के सशक्तीकरण को देश के लोकतांत्रिक विकास की दिशा में एक अहम कदम बताते हुए महिला आरक्षण को ऐतिहासिक अवसर करार दिया है। उन्होंने कहा कि भारत इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां समानता, समावेशन और जनभागीदारी को नई दिशा देने का अवसर मौजूद है।
लोकतंत्र को और प्रतिनिधिक बनाने की पहल
प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद के सामने एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, जिससे लोकतंत्र (Democracy) को और अधिक व्यापक और प्रतिनिधिक बनाया जा सके। महिला आरक्षण के जरिए लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें निर्णय प्रक्रिया में उचित स्थान मिलेगा।
महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब
उन्होंने इसे सिर्फ एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतीक बताया। पीएम मोदी ने कहा कि यह कदम महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ देश के विकास को भी नई गति देगा।
त्योहारों के बीच नई ऊर्जा का संदेश
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह ऐतिहासिक पहल ऐसे समय में हो रही है, जब देशभर में विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक पर्व मनाए जा रहे हैं। असम में रोंगाली बिहू, ओडिशा में पणा संक्रांति, पश्चिम बंगाल (West Bengal) में पोइला बैशाख, केरल में विषु, तमिलनाडु में पुथांडु और उत्तर भारत में बैसाखी जैसे त्योहार नई ऊर्जा और आशा का संदेश दे रहे हैं।
महापुरुषों की जयंती से प्रेरणा
उन्होंने 11 अप्रैल को महात्मा ज्योतिराव फुले और 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती का उल्लेख करते हुए कहा कि ये तिथियां सामाजिक न्याय और समानता की प्रेरणा देती हैं। इसी क्रम में 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा की जाएगी।
राजनीति में महिलाओं की भागीदारी जरूरी
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की लगभग आधी आबादी होने के बावजूद राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम है। उन्होंने जोर दिया कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से न केवल निर्णय प्रक्रिया मजबूत होगी, बल्कि शासन की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।
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सभी दलों से सहयोग की अपील
पीएम मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर सहमति बनाकर राष्ट्रहित में निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए अधिक न्यायपूर्ण और समावेशी भारत बनाने की दिशा में एक सामूहिक संकल्प है।
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