नई दिल्ली । Indian Railways ने देश में तेज रफ्तार रेल नेटवर्क (Rail Network) को मजबूत करने के लिए अपनी रणनीति साफ कर दी है। बुलेट ट्रेन से पहले अब पूरे नेटवर्क पर सेमी हाईस्पीड ट्रेनों के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली वंदे भारत ट्रेनों के बाद अब 220 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड वाली नई ट्रेनसेट को मंजूरी दी गई है।
तेज रफ्तार ट्रेनों की नई तैयारी
रेल मंत्रालय के अनुसार, यह नई पीढ़ी की सेमी हाईस्पीड ट्रेनें (Semi High Speed Train) मौजूदा ब्रॉड गेज ट्रैक पर ही संचालित होंगी। इससे अलग कॉरिडोर बनाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और कम लागत में ज्यादा शहरों को तेज कनेक्टिविटी मिल सकेगी।
बुलेट ट्रेन से अलग रणनीति
इसके विपरीत, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन (Bullet Train) जैसी परियोजनाओं के लिए अलग ट्रैक और भारी निवेश की जरूरत होती है। यही कारण है कि रेलवे फिलहाल चरणबद्ध तरीके से 200 किमी प्रति घंटे से अधिक गति वाले नेटवर्क को विकसित करने पर काम कर रहा है।
नई ट्रेनसेट को मिली मंजूरी
रेलवे बोर्ड ने मार्च के अंतिम सप्ताह में 2027-28 के कोच प्रोडक्शन प्रोग्राम के तहत दो 16-कोच ट्रेनसेट को मंजूरी दी है। स्टील बॉडी वाली इन ट्रेनों में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इनकी अनुमानित लागत करीब 866.87 करोड़ रुपये रखी गई है, जिससे यह परियोजना लागत और तकनीक दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर भी होगा अपग्रेड
तेज रफ्तार के साथ सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर को भी अपग्रेड किया जा रहा है। पारंपरिक स्लीपर की जगह अब कंपोजिट स्लीपर का उपयोग किया जा रहा है, जो हल्के, मजबूत और अधिक भार सहने में सक्षम हैं। इससे खासकर पुलों और क्रॉसिंग के दौरान यात्रा अधिक सुरक्षित और सुगम होगी।
तेज और सुरक्षित सफर की ओर कदम
रेलवे का यह कदम देश में तेज, सस्ता और सुरक्षित रेल नेटवर्क विकसित करने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। आने वाले समय में यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी और कम समय में यात्रा का अनुभव मिल सकेगा।
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