नई दिल्ली। लोकसभा में सोमवार को वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर आयोजित विशेष चर्चा के दौरान सदन में राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ गया। दरअसल वायनाड (Vaynad) से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने इस बहस की आवश्यकता पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् 150 वर्षों से देश की आत्मा का हिस्सा रहा है और 75 वर्षों से भारतीयों के दिल में बसा हुआ है, तो आज इस पर बहस क्यों? प्रियंका ने खुद ही इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि क्योंकि बंगाल का चुनाव आ रहा है और मोदी जी उसमें अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन्होंने स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी, आज सरकार उन्हीं पर आरोप लगा रही है। प्रियंका गांधी के इस बयान पर सदन में हंगामा मच गया।
भाजपा का पलटवार
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने प्रियंका के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वंदे मातरम् राष्ट्रभक्तों के लिए ऊर्जा है।उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “कुछ लोगों को इस गीत से एलर्जी है। जिन्ना के मुन्ना को भी वंदे मातरम् से दिक्कत है।”उनके इस बयान पर विपक्ष ने तीखी आपत्ति जताई।
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अखिलेश यादव का तंज
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि वंदे मातरम् वह गीत है जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देश को जोड़ा था। आज के दरारवादी लोग उसी गीत से देश को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “वंदे मातरम् सिर्फ गाने के लिए नहीं, बल्कि निभाने के लिए है।”
वंदे मातरम् का इतिहास
वंदे मातरम् भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख प्रेरणास्रोत रहा है। इसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के दिन लिखा था। यह 1882 में उनके उपन्यास आनंदमठ के साथ पहली बार सामने आया। 1896 में कांग्रेस अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने पहली बार इसे मंच से गाया था। यह क्षण राष्ट्रीय चेतना की शुरुआत का प्रतीक बन गया।
वंदे मातरम गीत कब और किसने लिखा था?
‘वंदे मातरम’ गीत बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1870 के दशक में (संभवतः 1875 में) लिखा था, और यह पहली बार उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ (1882) में प्रकाशित हुआ था; इसे 1896 के कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार सार्वजनिक रूप से गाया गया
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