Mumbai- उद्धव के खिलाफ फिर उठे सवाल, शिवसेना यूबीटी के 4 पार्षद लापता

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उद्धव
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मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में ठाणे और पालघर के बाद अब कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (केडीएमसी) सत्ता संघर्ष का नया केंद्र बन गई है। शिवसेना (UBT) के चार पार्षदों के अचानक लापता होने की खबर ने नगर निगम की राजनीति में भूचाल ला दिया है। उद्धव ठाकरे गुट ने अपने इन पार्षदों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिससे राज्य के दो प्रमुख राजनीतिक परिवारों और गुटों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। आरोप है कि ये पार्षद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।

शिंदे गुट को बढ़त, 62 के बहुमत आंकड़े के करीब

केडीएमसी के कुल 122 सदस्यों के सदन में बहुमत का आंकड़ा 62 है। वर्तमान समीकरणों को देखें तो शिंदे गुट के पास महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के 5 पार्षदों के समर्थन के साथ अब 53 नगरसेवक हो गए हैं। वहीं, उनकी सहयोगी भाजपा के पास 50 सदस्य हैं। यदि लापता बताए जा रहे शिवसेना (यूबीटी) के 4 पार्षद भी शिंदे गुट के साथ चले जाते हैं, तो यह गुट आसानी से बहुमत के आंकड़े को पार कर लेगा।

(यूबीटी) की मुश्किलें बढ़ीं: 11 में से सिर्फ 7 ने पंजीकरण कराया

शिवसेना (UBT) के लिए स्थिति तब और गंभीर हो गई जब यह पता चला कि उनके 11 निर्वाचित पार्षदों में से केवल 7 ने ही कोंकण प्रादेशिक आयुक्त के पास अपना पंजीकरण कराया है।

लापता पार्षदों में मनसे के पूर्व नेता भी शामिल

सूत्रों का कहना है कि संपर्क से बाहर चल रहे पार्षदों में मधुर म्हात्रे, कीर्ति ढोणे, राहुल कोट और स्वप्निल केने शामिल हैं। इनमें से कुछ पार्षद मूल रूप से मनसे से आए थे और स्थानीय समीकरणों के कारण अब उनके वापस लौटने या शिंदे गुट में जाने की संभावनाएं प्रबल हैं।

संजय राउत का आरोप: 24 घंटे में रास्ता बदलने वाले हैं गद्दार

इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सांसद संजय राउत ने कहा कि जो लोग पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीतकर 24 घंटे के भीतर रास्ता बदल लेते हैं, वे गद्दार हैं। उन्होंने ऐलान किया कि पार्टी इन पार्षदों के लापता होने के पोस्टर पूरे शहर में लगाएगी।

पुलिस ने माना ‘गुमशुदगी’ नहीं, कहा पार्षद अपनी मर्जी से गए

दूसरी ओर, कोलसेवाड़ी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज होने के बावजूद पुलिस प्रशासन ने इसे गुमशुदगी का मामला मानने से इनकार कर दिया है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि ये पार्षद अपनी मर्जी से कहीं गए हैं।

मनसे का समर्थन, ठाकरे भाइयों में बढ़ी कड़वाहट

इस बीच, मनसे के शिंदे गुट को समर्थन देने से ठाकरे भाइयों के बीच भी कड़वाहट बढ़ गई है। मनसे नेताओं का तर्क है कि यदि वे शिंदे गुट का साथ नहीं देते, तो उनके अपने पार्षद भी टूट सकते थे।

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कल्याण-डोंबिवली की ‘कैंची राजनीति’ पर महाराष्ट्र की नजर

फिलहाल, कल्याण-डोंबिवली की यह कैंची राजनीति किस करवट बैठेगी, इस पर पूरे महाराष्ट्र की नजरें टिकी हैं।

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Anuj Kumar

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