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ISRO- उपग्रह लॉन्चिंग में बाधा, इसरो का महत्त्वपूर्ण मिशन विफल

Anuj Kumar
Anuj Kumar
ISRO- उपग्रह लॉन्चिंग में बाधा, इसरो का महत्त्वपूर्ण मिशन विफल

श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के भरोसेमंद रॉकेट पीएसएलवी-सी62 के सोमवार को हुए प्रक्षेपण के बाद एक निराशाजनक खबर सामने आई है। सफल लॉन्चिंग के बावजूद, यह रॉकेट अपने साथ ले जाए गए उपग्रहों को उनकी निर्धारित कक्षाओं में स्थापित करने में विफल रहा। इसरो ने आधिकारिक तौर पर इस विफलता की पुष्टि करते हुए बताया कि वाहन ने तीसरे चरण के दौरान अपनी दिशा और स्थिति (ओरिएंटेशन) पर नियंत्रण खो दिया था। यह लगातार दूसरा मौका है जब पीएसएलवी (PSLV) के तीसरे चरण में इस तरह की गंभीर तकनीकी समस्या सामने आई है।

रॉकेट के पहले चरण सफल, लेकिन तकनीकी विसंगति आई

इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने मिशन कंट्रोल सेंटर से वैज्ञानिकों और देश को संबोधित करते हुए कहा कि रॉकेट के पहले तीन चरणों का प्रदर्शन पूरी तरह सामान्य था। हालांकि, इसके बाद एक अज्ञात तकनीकी विसंगति उत्पन्न हुई, जिससे उड़ान अपने निर्धारित पथ से भटक गई और मिशन को सफलतापूर्वक पूरा नहीं किया जा सका। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक वर्तमान में प्राप्त डेटा का गहन विश्लेषण कर रहे हैं और जल्द ही विफलता के सटीक कारणों की विस्तृत रिपोर्ट साझा की जाएगी।

अन्वेषा उपग्रह और मिशन का उद्देश्य

इस मिशन का मुख्य उद्देश्य रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के रणनीतिक उपग्रह अन्वेषा को अंतरिक्ष में स्थापित करना था। अन्वेषा एक आधुनिक ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है जिसे विशेष रणनीतिक उद्देश्यों के लिए डिजाइन किया गया था। इसके साथ ही, रॉकेट अपने साथ 15 अन्य अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उपग्रह भी ले गया था। इस प्रक्षेपण में भारतीय स्टार्टअप्स और विश्वविद्यालयों की बड़ी भागीदारी थी। विशेष रूप से हैदराबाद की कंपनी ध्रुवा स्पेस ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसने कुल 7 उपग्रहों में अपना योगदान दिया था। इनमें से 4 उपग्रह कंपनी द्वारा स्वयं निर्मित किए गए थे, जो कम डेटा रेट संचार तकनीक पर आधारित थे।

पीएसएलवी का इतिहास और वैश्विक प्रतिष्ठा

यह मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड की ओर से संचालित 9वां व्यावसायिक अर्थ ऑब्जर्वेशन मिशन था। पीएसएलवी को वैश्विक स्तर पर दुनिया के सबसे भरोसेमंद और सफल रॉकेट्स में गिना जाता है। इसने पूर्व में चंद्रयान-1, मंगलयान और सूर्य मिशन आदित्य-एल1 जैसी ऐतिहासिक उपलब्धियों को हासिल किया है। हालांकि, 12 जनवरी की इस घटना ने इसरो के वैज्ञानिकों के सामने नई चुनौतियां पेश कर दी हैं।

स्टार्टअप्स और भविष्य पर असर

फिलहाल पूरी स्थिति का आकलन किया जा रहा है, लेकिन प्राथमिक रिपोर्टों के अनुसार इस विफलता ने अंतरिक्ष क्षेत्र में काम कर रहे कई भारतीय स्टार्टअप्स के सपनों को भी प्रभावित किया है।

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