नई दिल्ली। वोटर लिस्ट की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने साफ कर दिया है कि मतदाता सूची (Voter List) में गड़बड़ी या लापरवाही बरतने वाले बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। आयोग का कहना है कि लोकतंत्र की नींव वोटर लिस्ट की शुद्धता पर टिकी है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बीएलओ की भूमिका पर आयोग की सख्ती
बीएलओ (BLO) चुनावी व्यवस्था की जमीनी कड़ी होते हैं, जिनकी जिम्मेदारी अपने-अपने बूथ पर मतदाता सूची को तैयार करना और समय-समय पर अपडेट रखना होती है। आमतौर पर एक बीएलओ के जिम्मे करीब 970 मतदाता या लगभग 300 घरों का रिकॉर्ड होता है।
लापरवाही या आदेश न मानने पर कार्रवाई
चुनाव आयोग ने राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजे निर्देशों में स्पष्ट किया है कि ड्यूटी में लापरवाही, गलत कार्यप्रणाली, जानबूझकर आदेशों की अवहेलना या वोटर लिस्ट की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में सख्त कार्रवाई अनिवार्य होगी।
निलंबन और विभागीय जांच का प्रावधान
नए नियमों के तहत जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) दोषी पाए जाने पर बीएलओ को निलंबित कर सकता है और उसके खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश करेगा। संबंधित विभाग को छह महीने के भीतर जांच और कार्रवाई पूरी कर उसकी जानकारी देना अनिवार्य होगा।
गंभीर मामलों में एफआईआर की अनुमति
यदि मामला आपराधिक प्रकृति का पाया जाता है, तो डीईओ मुख्य निर्वाचन अधिकारी की अनुमति से बीएलओ के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करा सकता है। इसके अलावा, राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी स्वयं या डीईओ की रिपोर्ट के आधार पर भी कार्रवाई का फैसला ले सकते हैं।
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लोकतंत्र को मजबूत करने की पहल
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन सख्त कदमों का उद्देश्य वोटर लिस्ट को पूरी तरह सही, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है, ताकि चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बना रहे और लोकतंत्र और अधिक मजबूत हो सके।
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