Latest Hindi News : Bihar- बिहार में विधायकों को टेलीफोन भत्ता बढ़ा, हर माह मिलेंगे ₹8,300

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बिहार विधानमंडल के सदस्यों—विधायकों और विधान पार्षदों—को टेलीफोन भत्ते (Telephone Allowances) में बड़ी राहत मिली है। नई नियमावली के तहत अब हर सदस्य को प्रति माह ₹8,300 का एकमुश्त भुगतान किया जाएगा। पहले की तरह बिल या वाउचर जमा करने की बाध्यता खत्म कर दी गई है। इस बदलाव से सदस्यों के लिए संचार संबंधी खर्च आसान होगा और सालाना भत्ता बढ़कर ₹99,600 हो गया है।

विधानमंडल में पेश हुआ संशोधन

संसदीय कार्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने बुधवार को विधानसभा में बिहार विधानमंडल (Bihar Vidhanmandal) (सदस्यों का वेतन, भत्ता और पेंशन) (संशोधन) नियमावली 2025 की प्रति पटल पर रखी। इसी संशोधन के लागू होने के बाद फोन भत्ते में यह बदलाव प्रभावी हुआ। यह प्रावधान विधानसभा और विधान परिषद दोनों के सभी सदस्यों पर लागू होगा।

हर महीने मिलेगा तय भत्ता

अब प्रत्येक विधायक और विधान पार्षद (Vidhan Parshad) को फोन उपयोग के लिए ₹8,300 की निर्धारित राशि मिलेगी। यह राशि सीधे भत्ता मद में शामिल होगी और इसके लिए किसी दस्तावेज, बिल या वाउचर की आवश्यकता नहीं होगी।

सदस्यों को संचार खर्च में ‘फ्री हैंड’

पहले फोन खर्च के लिए बिल जमा करने पड़ते थे, जिसका प्रोसेस समय लेने वाला था और भत्ता मिलने में देरी होती थी। नई प्रणाली के बाद यह वाउचर प्रथा पूरी तरह समाप्त हो गई है।
विधायक अपनी सुविधा के अनुसार इस राशि का उपयोग कई मोबाइल नंबर, इंटरनेट पैक, ऑफिस स्टाफ के नंबर या क्षेत्रीय संवाद के साधन मजबूत करने में कर सकेंगे।

बढ़ती कनेक्टिविटी की जरूरतों पर सरकार का तर्क

सरकार का कहना है कि जनप्रतिनिधियों का काम अब सिर्फ फोन कॉल तक सीमित नहीं रह गया है। व्हाट्सऐप, वीडियो कॉल, सोशल मीडिया और ऑनलाइन बैठकों के चलते उनका संचार दायरा बढ़ गया है। ऐसे में अधिक लचीलापन देना समय की मांग है।

भत्ता प्रशासनिक बोझ कम करेगा

संसदीय कार्यमंत्री ने बताया कि नई व्यवस्था से सदस्यों को आधिकारिक और व्यक्तिगत दोनों तरह के संवाद को मजबूत करने में मदद मिलेगी। बिल सत्यापन की परेशानी खत्म होने से प्रशासनिक बोझ भी कम होगा।

क्या यह जनता की प्राथमिकताओं के अनुरूप है?

नई व्यवस्था के तहत अब लगभग एक लाख रुपये सालाना संचार भत्ता मिलेगा। इससे संचार संबंधी जरूरतें तो आसान होंगी, लेकिन यह कितना उचित है और जनता की प्राथमिकताओं से कितना मेल खाता है, इस पर विचार की जरूरत बनी रहेगी।

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Anuj Kumar

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