तमिलनाडु से शुरू हुई आस्था की ऐतिहासिक यात्रा अब अपने लक्ष्य तक पहुंच चुकी है। विश्व का सबसे विशाल ‘सहस्त्र शिव लिंगम’ 47 दिनों की लंबी यात्रा पूरी कर बिहार (Bihar) के पूर्वी चंपारण जिले (East Chamapran) के कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर (Ramayana Temple) परिसर पहुंच गया है। 2225 किलोमीटर की इस अद्भुत यात्रा के बाद अब 17 जनवरी 2026 को वैदिक विधि-विधान के साथ इसकी भव्य स्थापना की जाएगी।
17 जनवरी को होगा भव्य अधिष्ठापन
मंदिर परिसर में तैयार 18 फीट ऊंचे पेडेस्टल और लगभग 15 फीट की मजबूत आधार संरचना पर ‘सहस्त्र शिव लिंगम’ को स्थापित किया जाएगा। इस अवसर पर देशभर से धर्माचार्य, संत और श्रद्धालु मौजूद रहेंगे। प्राण-प्रतिष्ठा की तिथि बाद में तय की जाएगी।
एक ही पत्थर से तराशा गया अद्भुत शिवलिंग
यह विशाल ‘सहस्त्र शिव लिंगम’ तमिलनाडु के महाबलीपुरम स्थित पट्टीकाडु गांव में एक ही काले ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित किया गया है। इसे आकार देने में पूरे 10 वर्षों का समय लगा। 33 फीट ऊंचा और करीब 210 मीट्रिक टन वजनी यह शिवलिंग अपनी भव्यता और शिल्पकला के कारण विश्वभर में अनूठा माना जा रहा है।
96 पहियों वाले ट्रक से तय की 2225 किमी की यात्रा
21 नवंबर 2025 को इस विशाल शिवलिंग को 96 चक्कों वाले विशेष ट्रक पर लादकर तमिलनाडु से बिहार के लिए रवाना किया गया था। कठिन रास्तों और तकनीकी चुनौतियों को पार करते हुए यह मंगलवार 6 जनवरी 2026 को 47वें दिन सुरक्षित रूप से कैथवलिया पहुंचा।
1008 शिवलिंगों की अलौकिक नक्काशी
विनायक वेंकटरमण की कंपनी के वास्तुकार लोकनाथ के मार्गदर्शन में तैयार इस शिवलिंग पर 1008 छोटे-छोटे शिवलिंगों की आकृतियां उकेरी गई हैं। यह शिल्प भारतीय वास्तुकला और आध्यात्मिक परंपरा का अद्भुत संगम है।
महावीर मंदिर ट्रस्ट के तहत हो रहा निर्माण
महावीर मंदिर ट्रस्ट, पटना के तत्वावधान में निर्मित विराट रामायण मंदिर के ट्रस्टी शायन कुणाल ने बताया कि ‘सहस्त्र शिव लिंगम’ मंदिर परिसर में पहुंच चुका है और 17 जनवरी को विधिवत अधिष्ठापन किया जाएगा।
जानें ‘सहस्त्र शिव लिंगम’ का आध्यात्मिक महत्व
आचार्य शिवानन्द ब्रह्मचारी उर्फ वाचस्पति मिश्र के अनुसार, ‘सहस्त्र शिव लिंगम’ हजारों शिव रूपों का प्रतीक है। यह भगवान शिव की अनंतता, निराकार स्वरूप और ब्रह्मांडीय शक्ति को दर्शाता है। जैसे सहस्रनाम में भगवान के अनेक गुणों का वर्णन होता है, वैसे ही यह लिंग शिव के असंख्य स्वरूपों का प्रतीक है।
स्व. आचार्य किशोर कुणाल का सपना हो रहा साकार
पूर्व आईपीएस अधिकारी और महावीर मंदिर ट्रस्ट के संस्थापक स्व. आचार्य किशोर कुणाल ने कैथवलिया में विश्व के सबसे बड़े विराट रामायण मंदिर की परिकल्पना की थी। उनके निधन के बाद पुत्र शायन कुणाल ने इस भव्य परियोजना की जिम्मेदारी संभाली और निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया।
2030 तक पूर्ण होगा विराट रामायण मंदिर
करीब 123 एकड़ क्षेत्र में बन रहा यह मंदिर 1080 फीट लंबा, 580 फीट चौड़ा और 270 फीट ऊंचा होगा। परिसर में कुल 22 मंदिर और 18 शिखर बनाए जाएंगे। मंदिर निर्माण को वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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