इंदौर । व्यापमं से जुड़े पटवारी भर्ती परीक्षा (Patwari Recruitment Exam) 2008 घोटाले में कोर्ट ने सख्त फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शुभ्रा सिंह की अदालत ने फर्जी कंप्यूटर प्रशिक्षण प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने वाले 10 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सभी को 5-5 साल के सश्रम कारावास और 1-1 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड (Penalty) जमा नहीं करने की स्थिति में प्रत्येक आरोपी को एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
कोर्ट का सख्त फैसला
अदालत ने प्रकरण की सुनवाई पूरी होने के बाद यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने माना कि आरोपियों ने जानबूझकर फर्जी प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल कर सरकारी नौकरी हासिल की और यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
कैसे उजागर हुआ पटवारी भर्ती घोटाला
इस घोटाले का खुलासा तब हुआ, जब भू-अभिलेख विभाग में पदस्थ ममता खेड़े ने खरगोन थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि पटवारी भर्ती परीक्षा 2008 में चयनित कुछ अभ्यर्थियों द्वारा लगाए गए कंप्यूटर योग्यता प्रमाण पत्र फर्जी हैं।
जांच में फर्जी पाए गए प्रमाण पत्र
शिकायत के बाद प्रमाण पत्रों की जांच आगरा की डॉ. भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी (Dr Bhim rao Ambedkar University) और भोपाल की बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी से कराई गई। जांच में सभी प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। यह भी सामने आया कि आरोपी इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 26 फरवरी 2011 से 24 अप्रैल 2011 तक नौकरी करते रहे।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और सरकारी रिकॉर्ड में उनका उपयोग करने जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया। बाद में मामला व्यापमं परीक्षाओं से जुड़ा होने के कारण हाईकोर्ट के आदेश पर जांच सीबीआई को सौंप दी गई।
सीबीआई ने पेश किया चालान
व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) से जुड़े घोटालों की जांच कर रही सीबीआई ने पटवारी भर्ती परीक्षा 2008 के इस मामले में विवेचना पूरी कर वर्ष 2014 में चालान कोर्ट में पेश किया।
20 से अधिक गवाहों के आधार पर सजा
अदालत ने 20 से ज्यादा गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और अन्य सबूतों के आधार पर सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया और उन्हें सजा सुनाई।
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व्यापमं घोटालों पर एक और बड़ी कार्रवाई
इस फैसले को व्यापमं से जुड़े मामलों में एक अहम कदम माना जा रहा है। कोर्ट के इस निर्णय से यह संदेश गया है कि भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ कानून सख्ती से कार्रवाई करेगा।
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