New Delhi। नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में (Narendra Modi) ने महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण को देश के नए युग की शुरुआत बताते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक कदम लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को लेकर दशकों से चर्चा हो रही थी और अब सभी दलों के सहयोग से इसे वास्तविकता में बदला गया है।
महिला आरक्षण पर सर्वसम्मति की बात
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2023 में लाया गया ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (‘Women Power Salutation Act’) सभी राजनीतिक दलों के समर्थन से पारित हुआ, जो लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है। उन्होंने जोर दिया कि महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना समय की मांग थी, जिसे अब व्यापक सहमति के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।
2029 तक लागू करने की तैयारी
पीएम मोदी ने बताया कि सभी दलों की यह साझा इच्छा है कि इस कानून को 2029 तक पूरी तरह लागू किया जाए। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है और 16 अप्रैल से संसद में इस विषय पर विस्तार से चर्चा प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में सभी की भागीदारी से संसद की गरिमा और मजबूत होगी।
सहयोग से बढ़ेगी लोकतंत्र की ताकत
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब सभी दल मिलकर काम करेंगे तो यह न केवल लोकतंत्र को मजबूत करेगा, बल्कि देश की महिलाओं के लिए भी गर्व का विषय होगा। उन्होंने इसे राजनीति से ऊपर उठकर लिया गया निर्णय बताया, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम है।
पुराने अनुभव का किया जिक्र
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का एक अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि 2001 में जब वे पहली बार मुख्यमंत्री बने, तब उन्हें प्रशासनिक अनुभव कम था। इसी दौरान एक विधायक उन्हें एक ऐसी ग्राम पंचायत की महिलाओं से मिलवाने ले गए, जहां सभी सदस्य महिलाएं थीं।
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महिला नेतृत्व की सोच ने किया प्रभावित
पीएम मोदी ने बताया कि जब उन्होंने उस पंचायत की महिला प्रधान से पांच साल का लक्ष्य पूछा, तो उनका जवाब बेहद प्रेरणादायक था। आठवीं पास उस महिला ने कहा था कि उनका उद्देश्य है कि गांव में कोई भी व्यक्ति गरीब न रहे। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सोच आज भी उन्हें प्रेरित करती है और महिलाओं की नेतृत्व क्षमता का मजबूत उदाहरण है।
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