नई दिल्ली । संसद के लोकसभा सदन में गुरुवार को महिला आरक्षण कानून (Women’s Reservation Law) में संशोधन से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए गए, जिन पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। बिल पेश होते ही विपक्षी दलों ने इसका विरोध शुरू कर दिया और इसे संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया।
विपक्ष का ‘संविधान हाईजैक’ का आरोप
सबसे पहले कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल (KC Venugopal) ने इन विधेयकों का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि सरकार संविधान को “हाइजैक” करने की कोशिश कर रही है। इसके बाद समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी बिल पर आपत्ति जताई और कहा कि जब तक मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण का प्रावधान नहीं किया जाएगा, तब तक इस कानून का कोई अर्थ नहीं है।
मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण पर उठा सवाल
इसी मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेता अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी के लिए आरक्षण की बात हो रही है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया जा रहा कि मुस्लिम महिलाओं को इसमें क्या स्थान मिलेगा।
अमित शाह का जवाब, धर्म आधारित आरक्षण पर सख्त रुख
इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट जवाब देते हुए कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना असंवैधानिक है और इसका कोई प्रश्न ही नहीं उठता। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि समाजवादी पार्टी चाहती है, तो वह अपने सभी टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है।
सीट बढ़ाने और महिला आरक्षण का प्रस्ताव
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार लोकसभा में सांसदों की कुल संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है, जिसमें राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें निर्धारित होंगी। साथ ही परिसीमन के बाद 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी।
वोटिंग में पास हुआ बिल
विधेयकों को पारित करने के लिए पहले ध्वनि मत से प्रयास किया गया, लेकिन विपक्ष के मत विभाजन की मांग पर मतदान कराया गया। इसमें 207 सांसदों ने समर्थन किया, जबकि 126 सांसदों ने विरोध में वोट दिया।
अन्य दलों का भी विरोध
एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी बिल का विरोध करते हुए कहा कि यह केवल महिला आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि संघीय ढांचे के खिलाफ भी है। वहीं, डीएमके सांसद टीआर बालू ने इसे “सैंडविच बिल” करार देते हुए कहा कि तीनों विधेयक आपस में जुड़े हुए हैं और उनकी पार्टी इसका विरोध करती है।
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जनगणना पर भी छिड़ी बहस
बहस के दौरान अखिलेश यादव ने सरकार पर जनगणना न कराने का आरोप लगाया। इस पर अमित शाह ने जवाब दिया कि देश में जनगणना प्रक्रिया जारी है और भविष्य में जातीय आंकड़े भी शामिल किए जाएंगे।
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