सेहत में सुधार और गिलक्रिस्ट का अपडेट
स्पोर्ट्स डेस्क: ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज डेमियन मार्टिन(Damien Martin) की स्थिति में चमत्कारिक सुधार हुआ है। मेनिन्जाइटिस (दिमाग में सूजन) के कारण पिछले कई दिनों से ‘इंड्यूस्ड कोमा’ में रहने के बाद, 54 वर्षीय मार्टिन अब होश में आ गए हैं। उनके करीबी दोस्त और पूर्व साथी खिलाड़ी एडम गिलक्रिस्ट ने पुष्टि की है कि मार्टिन अब बातचीत कर रहे हैं और इलाज का उन पर सकारात्मक असर हो रहा है। उन्हें जल्द ही आईसीयू (ICU) से सामान्य वार्ड में शिफ्ट किया जा सकता है।
सुनहरा करियर और 2003 वर्ल्ड कप की यादें
डेमियन मार्टिन का नाम ऑस्ट्रेलिया(Australia) के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शुमार है जिन्होंने अपनी क्लासिक बल्लेबाजी से दुनिया को प्रभावित किया। वे 1999 और 2003 की वर्ल्ड कप विजेता ऑस्ट्रेलियाई टीम का हिस्सा थे। भारतीय फैंस को आज भी 2003 वर्ल्ड कप का फाइनल(Damien Martin) याद है, जहां मार्टिन ने टूटी हुई उंगली के बावजूद नाबाद 88 रनों की शानदार पारी खेली थी और रिकी पोंटिंग के साथ मिलकर भारत से जीत छीन ली थी। उन्होंने अपने करियर में 67 टेस्ट और 208 वनडे मैच खेले हैं।
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बॉक्सिंग डे से शुरू हुई थी जंग
मार्टिन की तबीयत अचानक 26 दिसंबर (बॉक्सिंग डे) को बिगड़ी थी, जिसके बाद उन्हें 27 दिसंबर को ब्रिस्बेन के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। संक्रमण इतना गंभीर था कि डॉक्टरों को उन्हें बचाने के लिए कोमा में रखना पड़ा। मार्टिन(Damien Martin) न केवल एक बेहतरीन खिलाड़ी रहे हैं, बल्कि 2006 में संन्यास के बाद भी वे एक कमेंटेटर और मेंटर के रूप में क्रिकेट जगत से जुड़े रहे। पूरी दुनिया के क्रिकेट प्रेमी उनके जल्द पूरी तरह स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं।
डेमियन मार्टिन को कौन सी बीमारी हुई थी और उनकी हालत इतनी गंभीर क्यों हो गई थी?
मार्टिन को मेनिन्जाइटिस(Damien Martin) हुआ था, जो मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के चारों ओर सुरक्षात्मक झिल्लियों में होने वाली सूजन है। इस बीमारी के कारण उनके दिमाग में गंभीर सूजन आ गई थी, जिसके चलते डॉक्टरों को उन्हें ‘इंड्यूस्ड कोमा’ में रखना पड़ा था।
डेमियन मार्टिन का भारतीय क्रिकेट के खिलाफ सबसे यादगार प्रदर्शन कौन सा रहा है?
मार्टिन का सबसे यादगार प्रदर्शन 2003 वर्ल्ड कप फाइनल में भारत के खिलाफ रहा। उन्होंने रिकी पोंटिंग के साथ 234 रनों की विशाल साझेदारी की और 84 गेंदों पर नाबाद 88 रन बनाए, जिसकी बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने वर्ल्ड कप जीता था।
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