CM : अंबेडकर का संघर्ष पूरी दुनिया के लिए आदर्श – रेवंत रेड्डी

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रेवंत रेड्डी
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डॉ. बी. आर. अंबेडकर जयंती पर मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि

हैदराबाद। भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर तेलंगाना (Telangana) के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने समाज के वंचित वर्गों के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया और दलित, आदिवासी, पिछड़े वर्गों तथा महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए निरंतर संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि अंबेडकर ने अपने दूरदर्शी दृष्टिकोण से देश के भविष्य की रूपरेखा तैयार की और संविधान (Constitution) का निर्माण किया, जो आज भी प्रेरणा का स्रोत है।

अंबेडकर का संघर्ष पूरी दुनिया के लिए आदर्श

सीएम रेवंत रेड्डी ने कहा कि वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए अंबेडकर का संघर्ष पूरी दुनिया के लिए आदर्श है और उनके आदर्शों को साकार करने के लिए सभी को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अंबेडकर के विचारों से प्रेरित होकर एससी उपवर्गों के वर्गीकरण, बीसी आरक्षण वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। साथ ही एससी-एसटी सब-प्लान को प्रभावी रूप से लागू कर समाज के कमजोर वर्गों के कल्याण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकारी आवासीय विद्यालयों में मेस और कॉस्मेटिक शुल्क बढ़ाकर छात्रों के कल्याण में सुधार किया गया है। इसके अलावा हर विधानसभा क्षेत्र में ‘यंग इंडिया इंटीग्रेटेड रेजिडेंशियल स्कूल’ स्थापित किए जा रहे हैं, जहां सभी वर्गों के बच्चों को एक साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी।

अंबेडकर के तीन नारे कौन से हैं?

“शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो” यह नारा डॉ. भीमराव अंबेडकर से सबसे अधिक जोड़ा जाता है। इसका अर्थ है कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा जरूरी है, एकता आवश्यक है और अन्याय के खिलाफ संघर्ष करना चाहिए। यह विचार दलित और पिछड़े वर्गों के सामाजिक उत्थान और समानता के लिए प्रेरणा देता है।

बाबा साहब का इतिहास क्या है?

डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था। वे भारत के महान समाज सुधारक, विधिवेत्ता और संविधान निर्माता थे। उन्होंने जातिगत भेदभाव के खिलाफ जीवनभर संघर्ष किया और समाज में समानता के अधिकारों की वकालत की। वे स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री भी बने और उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाई।

14 अप्रैल क्यों मनाया जाता है?

14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जिसे अंबेडकर जयंती कहा जाता है। इस दिन लोग उनके योगदान, विचारों और समाज सुधार के कार्यों को याद करते हैं। स्कूलों, सरकारी संस्थानों और सामाजिक संगठनों में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह दिन समानता, शिक्षा और सामाजिक न्याय के संदेश को फैलाने के लिए मनाया जाता है।

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Ajay Kumar Shukla

लेखक परिचय

Ajay Kumar Shukla

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