हैदराबाद। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल (Governor Shiv Pratap Shukla) ने कहा कि सामाजिक प्रगति के लिए केवल दंड ही नहीं, बल्कि सुधार भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जेलों को केवल कैद के केंद्रों से आगे बढ़ाकर आत्ममंथन, व्यक्तित्व विकास और नई शुरुआत के संस्थानों में परिवर्तित किया जाना चाहिए। राज्यपाल ने मंगलवार को हैदराबाद के चंचलगुड़ा स्थित स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ करेक्शनल एडमिनिस्ट्रेशन में “फील द जेल” (Feel the Jail) अनुभवात्मक कार्यक्रम और जेल संग्रहालय का उद्घाटन करने के बाद ये बातें कहीं। अपने दौरे के दौरान राज्यपाल ने विशेष रूप से तैयार किए गए “फील द जेल” सेल्स का निरीक्षण किया, जिनका उद्देश्य आगंतुकों को जेल जीवन और कारावास की वास्तविकताओं का प्रत्यक्ष अनुभव कराना है। इसके बाद उन्होंने जेल संग्रहालय का उद्घाटन कर विभिन्न दीर्घाओं का अवलोकन किया, जिनमें जेल व्यवस्था के इतिहास और विकास को प्रदर्शित किया गया है।
विशेष रूप से तैयार किए गए “फील द जेल” सेल्स का निरीक्षण
प्रदर्शनी में निजाम काल की जेलों, नागार्जुन सागर बांध निर्माण में कैदियों के योगदान, प्रसिद्ध हस्तियों जैसे दाशरथि कृष्णमाचार्युलु और कंचेरला गोपन्ना से जुड़े मॉडल जेल सेल, कैदियों के पुनर्वास, जेल उद्योगों तथा विभाग की उपलब्धियों को दर्शाया गया। राज्यपाल ने कैदियों द्वारा निर्मित उत्पादों का भी अवलोकन किया और “वाल्मीकि” नामक डॉक्यूमेंट्री देखी, जिसमें कैदियों के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए किए जा रहे सुधारात्मक उपायों को दर्शाया गया। सभा को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि जेल संग्रहालय का उद्घाटन केवल एक नई सुविधा का शुभारंभ नहीं, बल्कि राज्य की अधिक मानवीय और सुधारोन्मुख न्याय प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि पुरानी बेड़ियों और जेल कोठरियों का प्रदर्शन अतीत की कठोर दंड व्यवस्था की याद दिलाता है, जबकि कौशल विकास और जेल में निर्मित उत्पादों पर दिया गया जोर “प्रतिशोध से परिवर्तन” की दिशा में सार्थक बदलाव को दर्शाता है।
कैदियों का पुनर्वास समाज की नैतिक जिम्मेदारी
राज्यपाल ने कहा कि किसी भी प्रगतिशील समाज का वास्तविक चरित्र इस बात से तय होता है कि वह अपराध करने वालों के सुधार के प्रति कितनी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी दिखाता है। उन्होंने कहा कि कैदियों का पुनर्वास समाज की नैतिक जिम्मेदारी है। राज्यपाल ने इस पहल की परिकल्पना और क्रियान्वयन के लिए डॉ. सौम्या मिश्रा तथा विभाग के अन्य अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने विश्वास जताया कि जेल संग्रहालय केवल एक पर्यटन आकर्षण ही नहीं, बल्कि शिक्षा, शोध और जनजागरूकता का महत्वपूर्ण मंच भी बनेगा।
भारत के वर्तमान राज्यपाल कौन हैं?
देश के प्रत्येक राज्य में अलग-अलग राज्यपाल नियुक्त किए जाते हैं, इसलिए पूरे भारत का एक ही राज्यपाल नहीं होता। राज्यपाल किसी राज्य का संवैधानिक प्रमुख माना जाता है और उसकी नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। वर्तमान समय में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अलग-अलग व्यक्ति इस पद पर कार्य कर रहे हैं। उनका मुख्य कार्य संविधान के अनुसार राज्य प्रशासन की निगरानी करना होता है। विधानसभा सत्र बुलाने, विधेयकों को मंजूरी देने और सरकार गठन जैसी प्रक्रियाओं में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
राज्यपाल किसे कहते हैं?
किसी राज्य के संवैधानिक प्रमुख को यह पद दिया जाता है। यह व्यक्ति राज्य में राष्ट्रपति का प्रतिनिधि माना जाता है और संविधान के अनुसार विभिन्न प्रशासनिक कार्यों का निर्वहन करता है। मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद की सलाह पर अधिकांश कार्य किए जाते हैं। विधानसभा सत्र बुलाना, विधेयकों को मंजूरी देना और सरकार गठन की प्रक्रिया में भूमिका निभाना इसके प्रमुख कार्यों में शामिल है। भारतीय संविधान के अनुसार इस पद की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और इसका कार्यकाल सामान्यतः पांच वर्ष का माना जाता है।
राजपाल का वेतन कितना है?
वर्तमान समय में इस पद पर कार्य करने वाले व्यक्ति को लगभग 3 लाख 50 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाता है। इसके अलावा सरकारी आवास, सुरक्षा, वाहन और अन्य कई सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। यह वेतन केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किया जाता है और समय-समय पर इसमें बदलाव भी किया जा सकता है। संवैधानिक पद होने के कारण इस जिम्मेदारी को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। राज्य के प्रशासनिक और औपचारिक कार्यों में इसकी अहम भूमिका रहती है तथा कई सरकारी कार्यक्रमों में भी भागीदारी होती है।
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