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Politics : बीआरएस ने की यूरिया संकट के लिए कांग्रेस सरकार की आलोचना

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Politics : बीआरएस ने की यूरिया संकट के लिए कांग्रेस सरकार की आलोचना

350-400 रुपये प्रति बैग की बढ़ी हुई कीमत पर यूरिया खरीदने को मजबूर

हैदराबाद: किसानों के मुद्दों को सुलझाने में कांग्रेस सरकार (Congress Govt.) की अक्षमता की आलोचना करते हुए भारत राष्ट्र समिति (BRS) के नेता और पूर्व मंत्री एस निरंजन रेड्डी ने शनिवार को कहा कि यूरिया संकट के तेलंगाना के लिए गंभीर परिणाम होंगे। तेलंगाना भवन में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों को लम्बी कतारों में खड़ा होने के लिए मजबूर कर रही है और उन्हें काला बाजार से 350-400 रुपये प्रति बैग की बढ़ी हुई कीमत पर उर्वरक, विशेष रूप से यूरिया खरीदने के लिए मजबूर कर रही है, जबकि सब्सिडी दर 266.50 रुपये है

संकट पर डाला प्रकाश

रेड्डी ने शत्रुजुपल्ली गांव की एक घटना का हवाला देते हुए इस संकट पर प्रकाश डाला, जहां एक किसान को जन्मदिन के उपहार में यूरिया की एक बोरी मिली, जो संकट की गंभीरता को दर्शाता है। धान, कपास और बागवानी की फसलें उगाने वाले किसान इस कमी का खामियाजा भुगत रहे हैं। उन्होंने कहा कि खरीफ की बुवाई 45 लाख एकड़ धान, 46 लाख एकड़ कपास और 9 लाख एकड़ बागवानी फसलों तक पहुंच गई है, लेकिन पिछले साल की तुलना में धान का रकबा 22 लाख एकड़ कम हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यूरिया की कमी के कारण फसल की पैदावार 10 से 15 प्रतिशत तक प्रभावित होने की संभावना है।

यूरिया कहां गया?

केंद्र का दावा है कि उसने 2025 के खरीफ सीजन के लिए 9.8 लाख मीट्रिक टन (एमएमटी) यूरिया आवंटित किया है, लेकिन तेलंगाना सरकार ने केवल 4.5-5.12 एलएमटी प्राप्त होने का दावा किया है, जिससे आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कृषि मंत्री थुम्माला नागेश्वर राव ने केंद्र पर कमी का आरोप लगाया, जबकि भाजपा नेताओं ने राज्य स्तर पर गड़बड़ी का आरोप लगाया। उन्होंने पूछा, ‘‘यूरिया कहां गया?’’ उन्होंने याद दिलाया कि के. चंद्रशेखर राव के कार्यकाल के दौरान 1.35 करोड़ एकड़ के लिए 10 एलएमटी यूरिया की आपूर्ति सुचारू रूप से की गई थी।

भारत में यूरिया कहाँ से आता है?

देश में यूरिया का स्रोत मुख्यतः दो माध्यमों से होता है—घरेलू उत्पादन और आयात। घरेलू उत्पादन सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की उर्वरक फैक्ट्रियों से होता है, जहां प्राकृतिक गैस या नाफ्था को कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाता है। हालांकि भारत की खपत इतनी अधिक है कि इसे पूरा करने के लिए सरकार हर वर्ष बड़ी मात्रा में यूरिया का आयात भी करती है। प्रमुख आयातक देश चीन, रूस, कतर, ओमान और नाइजीरिया जैसे राष्ट्र हैं। किसानों को यह उर्वरक सब्सिडी दरों पर उपलब्ध कराया जाता है, ताकि कृषि उत्पादन प्रभावित न हो।

यूरिया का रासायनिक सूत्र क्या है?

रसायन विज्ञान की दृष्टि से यूरिया एक कार्बनिक यौगिक है जिसका रासायनिक सूत्र CO(NH₂)₂ है। इसे कार्बामाइड भी कहा जाता है। यह यौगिक सफेद, क्रिस्टलीय ठोस के रूप में पाया जाता है और जल में घुलनशील होता है। इसकी संरचना में एक कार्बोनिल समूह (C=O) और उससे जुड़े दो एमीन समूह (-NH₂) होते हैं। यूरिया पौधों के लिए नाइट्रोजन का सबसे प्रभावी स्रोत माना जाता है, क्योंकि इसमें लगभग 46 प्रतिशत नाइट्रोजन होता है। इसी कारण इसे विश्वभर में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला नाइट्रोजन उर्वरक माना जाता है।

यूरिया का रेट क्या है?

भारत में यूरिया किसानों को सब्सिडी के साथ उपलब्ध कराया जाता है, इसलिए इसका बाजार मूल्य स्थिर और नियंत्रित रहता है। वर्तमान में यूरिया की कीमत लगभग ₹266.50 प्रति 45 किलोग्राम बैग तय की गई है, जिसमें जीएसटी अतिरिक्त रूप से शामिल होता है। असली कीमत सरकार की सब्सिडी नीति के कारण काफी कम हो जाती है, जबकि बिना सब्सिडी के यूरिया का दाम बहुत अधिक होता। सरकार हर वर्ष इसके मूल्य को नियंत्रित रखती है ताकि किसानों को सस्ते दर पर उर्वरक मिल सके और कृषि उत्पादन पर बोझ न पड़े।

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