Illegal-Animals : अवैध पशु तस्करी पर की सख्त कार्रवाई की मांग

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अवैध पशु
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Illegal-Animals : हैदराबाद। तेलंगाना गौशाला फेडरेशन (Telangana Gaushala Federation) ने राज्य सरकार से बकरीद से पहले अवैध पशु (Illegal-Animals) परिवहन, तस्करी और अनधिकृत वध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। हैदराबाद के हाइदेरगुड़ा स्थित एनएसएस में आयोजित प्रेस वार्ता में फेडरेशन के अध्यक्ष महेश अग्रवाल, ‘लव फॉर काउ’ के अध्यक्ष जस्मत पटेल और ट्रस्टी ऋतेश जगीरदार ने आरोप लगाया कि त्योहार के समय का लाभ उठाकर असामाजिक तत्व बड़े पैमाने पर गोवंशीय पशुओं के वध और अवैध परिवहन में संलिप्त हैं। उन्होंने कहा कि कानून के तहत गाय, बछड़े और भैंस के बछड़ों का वध प्रतिबंधित है तथा जहां अनुमति प्राप्त वध होता है, वहां भी सख्त प्रमाणन और निर्धारित वध क्षेत्र आवश्यक हैं।

बकरीद से पहले निगरानी बढ़ाने का आग्रह

इसके बावजूद पड़ोसी जिलों और राज्यों से अवैध पशु बाजारों और अनधिकृत परिवहन नेटवर्क के सक्रिय होने की आशंका जताई गई। फेडरेशन ने संविधान के अनुच्छेद 48 का उल्लेख करते हुए कहा कि पशुधन संरक्षण राज्य का दायित्व है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस निगरानी और चेक पोस्ट के बावजूद जमीनी स्तर पर अवैध पशु तस्करी जारी है। उन्होंने मांग की कि अनधिकृत वधशालाओं को तुरंत बंद किया जाए, राष्ट्रीय राजमार्गों पर जांच बढ़ाई जाए, पशु परिवहन मार्गों पर चौबीसों घंटे पुलिस निगरानी रखी जाए तथा उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए। साथ ही पशुपालन विभाग के साथ समन्वय कर पशुओं के स्वास्थ्य प्रमाणपत्रों की जांच की भी मांग की गई।

शांतिपूर्ण आंदोलन और कानूनी कार्रवाई को बढ़ाएंगे आगे

फेडरेशन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने प्रभावी कदम नहीं उठाए तो वे शांतिपूर्ण आंदोलन और कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि तेलंगाना की सभी गौशालाएं और ‘लव फॉर काउ’ पहल बचाए गए पशुओं के संरक्षण और पुनर्वास में सहयोग के लिए तैयार हैं। कार्यक्रम में स्वामी कमलेश महाराज, जसवंत सुरानी सहित अन्य लोग भी उपस्थित रहे।

बकरा ईद क्यों मनाई जाती है?

यह त्योहार पैगंबर हजरत इब्राहिम द्वारा अपने बेटे की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है और पवित्र शहर मक्का की हज यात्रा के अंत का प्रतीक है। इस्लामिक मान्यता के अनुसार अल्लाह ने हजरत इब्राहिम की परीक्षा ली थी और उनसे अपने प्रिय पुत्र की कुर्बानी मांगी थी। उनकी आज्ञाकारिता और आस्था से प्रसन्न होकर अल्लाह ने उनके पुत्र को जीवित रखा। उसी त्याग और भक्ति की याद में यह पर्व मनाया जाता है।

बकरीद का दूसरा नाम क्या है?

ईद-उल-अजहा को बकरीद, बकरा ईद अथवा ईद-उल-बकरा के नाम से भी जाना जाता है। इसे “बलिदान का त्यौहार” भी कहा जाता है। अरबी में “अजहा” का अर्थ ही बलिदान होता है। अलग-अलग देशों में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है — जैसे तुर्की में “कुर्बान बयरामी” और मलेशिया में “हरी राया हाजी” कहते हैं।

17 जून को मुसलमानों का कौन सा त्यौहार है?

2025 में ईद-उल-अजहा भारत में 7 जून को मनाई गई। 17 जून 2025 को कोई प्रमुख इस्लामिक त्यौहार नहीं था। अगर आप 2026 की बात कर रहे हैं तो ईद-उल-अजहा 2026 में इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार मई के अंत या जून की शुरुआत में पड़ सकती है — सटीक तिथि चांद दिखने पर तय होती है।

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Ajay Kumar Shukla

लेखक परिचय

Ajay Kumar Shukla

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