RT-PCR : हैदराबाद। जीनोम फाउंडेशन (Genome Foundation) ने हैदराबाद में अत्याधुनिक आरटी-पीसीआर (RT-PCR) (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलिमरेज़ चेन रिएक्शन) सुविधा का शुभारंभ किया। यह कदम दुर्लभ बीमारियों के निदान और जीनोमिक अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस उन्नत प्रयोगशाला का उद्घाटन जीनोम फाउंडेशन के प्रबंध निदेशक डॉ. के. पी. सी. गांधी ने किया। उन्होंने कहा कि यह नई सुविधा संस्था की दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित मरीजों की सहायता क्षमता को और मजबूत करेगी तथा युवा शोधकर्ताओं और चिकित्सकों के लिए प्रशिक्षण के अवसर भी बढ़ाएगी।
दुर्लभ बीमारियों के निदान में मिलेगी बड़ी मदद
डॉ. गांधी ने कहा कि अब आरटी-पीसीआर परीक्षण संस्था के भीतर ही किए जा सकेंगे, जिससे महत्वपूर्ण आनुवंशिक परीक्षणों की रिपोर्ट आने में लगने वाला समय कम होगा और मरीजों को तेजी से परिणाम उपलब्ध हो सकेंगे। आरटी-पीसीआर एक अत्यंत संवेदनशील आणविक निदान तकनीक है, जिसका उपयोग आनुवंशिक सामग्री का पता लगाने और विश्लेषण करने के लिए किया जाता है। यह तकनीक चिकित्सा निदान, जैविक अनुसंधान और फॉरेंसिक विज्ञान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नई सुविधा से सटीक आणविक परीक्षणों की उपलब्धता बढ़ने, आनुवंशिक विकारों का शीघ्र पता लगाने तथा स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों और छात्रों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। गौरतलब है कि जीनोम फाउंडेशन एक गैर-लाभकारी संगठन है, जो जीनोमिक अनुसंधान और दुर्लभ बीमारियों के निदान के क्षेत्र में कार्य कर रहा है।
दुर्लभ बीमारी क्या होती है?
किसी भी ऐसी बीमारी को दुर्लभ कहा जाता है जो बहुत कम लोगों को प्रभावित करती है। भारत में प्रति 10,000 लोगों में से 1 से कम व्यक्ति को होने वाली बीमारी को दुर्लभ रोग की श्रेणी में रखा जाता है। ये बीमारियां अक्सर जेनेटिक कारणों से होती हैं और इनका इलाज बेहद महंगा या अनुपलब्ध होता है। दुनिया में लगभग 7,000 से अधिक दुर्लभ बीमारियां दर्ज हैं।
दुर्लभ बीमारी के उदाहरण क्या हैं?
प्रमुख दुर्लभ बीमारियों में हटिंगटन रोग (मस्तिष्क की कोशिकाएं नष्ट होती हैं), स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (मांसपेशियां कमजोर होती हैं), गौचर रोग (वसा का संचय), फेनिलकेटोनुरिया (चयापचय विकार), प्रोजेरिया (असामान्य तेज उम्र बढ़ना) और विल्सन रोग (शरीर में तांबा जमा होना) शामिल हैं। भारत में सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया भी दुर्लभ रोगों में गिने जाते हैं।
सबसे घातक बीमारी कौन सी होती है?
मृत्यु दर के आधार पर हृदय रोग दुनिया की सबसे घातक बीमारी है, जिससे हर साल लगभग 1.8 करोड़ लोगों की मृत्यु होती है। इसके अलावा कैंसर, स्ट्रोक और क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) भी अत्यंत घातक हैं। संक्रामक बीमारियों में रेबीज सबसे घातक मानी जाती है क्योंकि लक्षण प्रकट होने के बाद इसकी मृत्यु दर लगभग 100 प्रतिशत होती है।
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