Hyderabad : मानसून से पहले कोयला उत्पादन सुचारू रखने के निर्देश

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कोयला उत्पादन
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हैदराबाद। सिंगरेणी (Singareni) कोलरीज कंपनी लिमिटेड ने आगामी दक्षिण-पश्चिम मानसून को देखते हुए कोयला उत्पादन में किसी भी तरह की बाधा न आने देने के लिए विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं। कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक बुद्धप्रकाश ज्योति ने शनिवार को सभी क्षेत्रों के महाप्रबंधकों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में मानसून के दौरान उत्पादन, जल निकासी व्यवस्था और कोयला आपूर्ति की तैयारियों पर चर्चा की गई। एससीसीएल के अनुसार वर्तमान में लगभग 95% उत्पादन ओपन कास्ट खदानों से होता है, जहां भारी बारिश (Heavy rain) के दौरान पानी भरने से उत्पादन प्रभावित होने की संभावना रहती है। इस स्थिति से निपटने के लिए कंपनी पहले ही 100 से अधिक भारी पंप और मोटर स्थापित कर चुकी है।

एससीसीएल सीएमडी ने जीएम के साथ की समीक्षा बैठक

इसके अलावा जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कंपनी और निजी पंप लगाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि खदानों में पानी जमा न हो और उत्पादन बाधित न हो। सीएमडी ने कहा कि सभी क्षेत्रों को मानसून शुरू होने से पहले अधिकतम कोयला उत्पादन सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि बारिश के दौरान संभावित नुकसान की भरपाई की जा सके। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड द्वारा थर्मल पावर प्लांट्स को ईंधन आपूर्ति समझौतों के तहत निर्बाध कोयला आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। बैठक में उत्पादन, परिवहन और ओवरबर्डन हटाने की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर लगातार नजर रखने और आवश्यकतानुसार त्वरित कदम उठाने के निर्देश दिए गए।

भारत में मानसून कहां पहुंचा है?

दक्षिण-पश्चिम मानसून हर साल अलग-अलग समय पर भारत के विभिन्न हिस्सों में पहुंचता है। सामान्य तौर पर इसकी शुरुआत केरल तट से होती है और फिर धीरे-धीरे दक्षिण, पूर्व, मध्य और उत्तर भारत की ओर बढ़ता है। मौसम विभाग समय-समय पर मानसून की प्रगति की जानकारी जारी करता है। बारिश, हवाओं और बादलों की स्थिति के आधार पर इसका विस्तार तय होता है। किसानों और आम लोगों के लिए मानसून की जानकारी काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

मोबाइल में बारिश कैसे देखें?

मौसम की जानकारी देखने के लिए मोबाइल में वेदर ऐप या इंटरनेट का उपयोग किया जा सकता है। कई स्मार्टफोन में पहले से मौसम संबंधी सुविधा उपलब्ध रहती है, जहां तापमान, बारिश और हवा की जानकारी दिखाई जाती है। ऑनलाइन मौसम सेवाएं और रडार मैप भी वर्षा की संभावना बताते हैं। लोकेशन ऑन करने पर आपके क्षेत्र का मौसम अपडेट आसानी से देखा जा सकता है। समय-समय पर ऐप डेटा अपडेट करता रहता है।

बारिश की संभावना 80% का क्या मतलब है?

मौसम पूर्वानुमान में 80% संभावना का अर्थ होता है कि संबंधित क्षेत्र में बारिश होने की काफी अधिक संभावना है। इसका मतलब यह नहीं कि पूरे क्षेत्र में हर जगह निश्चित रूप से बारिश होगी, बल्कि मौसम वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार वर्षा की संभावना ज्यादा मानी जा रही है। बादल, नमी और हवा की स्थिति के आधार पर यह अनुमान लगाया जाता है। मौसम पूर्वानुमान समय के साथ बदल भी सकता है।

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Ajay Kumar Shukla

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Ajay Kumar Shukla

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