Project : प्रणहिता–चेवेला परियोजना पुनर्जीवित करने की कवायद तेज

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महाराष्ट्र से वार्ता की तैयारी

हैदराबाद। तेलंगाना सरकार ने लंबे समय से लंबित प्रणहिता–चेवेला लिफ्ट सिंचाई परियोजना (Pranahita–Chevella Lift Irrigation Project) को पुनर्जीवित करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। इसके तहत सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि तम्मिडीहट्टी बैराज को लेकर महाराष्ट्र सरकार से बातचीत के लिए विस्तृत तकनीकी प्रस्ताव तैयार किए जाएं। उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मंत्री ने कहा कि परियोजना का ऐसा डिजाइन तैयार किया जाए जिससे महाराष्ट्र और चपराला वन्यजीव अभयारण्य में जलभराव (Water logging) कम से कम हो। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों के लिए उचित मुआवजे का आश्वासन भी दिया।

वैकल्पिक मार्गों की पूरी जानकारी आवश्यक

मंत्री ने कहा कि अंतरराज्यीय बातचीत के लिए विस्तृत तकनीकी अध्ययन, लागत-लाभ विश्लेषण और वैकल्पिक मार्गों की पूरी जानकारी आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां संभव हो, गुरुत्वाकर्षण आधारित जल प्रवाह को प्राथमिकता दी जाए ताकि दीर्घकालिक संचालन लागत कम हो सके। उन्होंने कहा कि मूल योजना के अनुसार तम्मिडीहट्टी बैराज से गुरुत्वाकर्षण नहरों के माध्यम से उत्तर तेलंगाना और चेवेला जैसे अंतिम क्षेत्रों तक पानी पहुंचाया जाना था। उन्होंने पूर्व बीआरएस सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने इस योजना को बदलकर कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना का रूप दिया, जिससे सिंचाई क्षेत्र बढ़ा लेकिन बिजली आधारित लिफ्ट पर निर्भरता भी बढ़ गई।

प्रवाह प्रणाली को बहाल करने की योजना पर काम कर रही सरकार

सरकार अब मौजूदा ढांचे को समायोजित करते हुए लागत-कुशल गुरुत्वाकर्षण प्रवाह प्रणाली को बहाल करने की योजना पर काम कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि आईआईटी हैदराबाद और अन्य विशेषज्ञ संस्थानों द्वारा तम्मिडीहट्टी को येलमपल्ली से जोड़ने के चार वैकल्पिक मार्गों का अध्ययन किया जा रहा है, जिससे भूमि अधिग्रहण और पंपिंग लागत कम हो सके। भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण भी जारी है। इसके साथ ही सरकार मेडीगड्डा, अन्नाराम और सुंदरला बैराज की मरम्मत को मानसून से पहले पूरा करने के लिए राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में तेजी से कार्य कर रही है।

प्राणहिता परियोजना क्या है?

यह तेलंगाना की एक महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना है, जिसका उद्देश्य किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना और कृषि उत्पादन बढ़ाना है। यह परियोजना मुख्य रूप से उत्तर तेलंगाना के क्षेत्रों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई थी। बाद में इसे कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना से भी जोड़ा गया। इसका लक्ष्य पेयजल, सिंचाई और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करना है।

प्राणहिता किस नदी में मिलती है?

यह नदी आगे चलकर Godavari River में मिलती है। प्राणहिता दक्षिण भारत की एक महत्वपूर्ण नदी मानी जाती है और इसका जल प्रवाह काफी बड़ा है। यह कई सहायक नदियों के मिलन से बनती है और अंततः गोदावरी नदी में अपना जल समर्पित करती है, जिससे कृषि और जल संसाधनों को बड़ा लाभ मिलता है।

प्राणहिता किसकी सहायक नदी है?

यह Godavari River की प्रमुख सहायक नदी है। प्राणहिता का निर्माण मुख्य रूप से वर्धा, वैंगंगा और पैनगंगा जैसी नदियों के संगम से होता है। इसका जल प्रवाह बहुत अधिक होने के कारण इसे गोदावरी की सबसे महत्वपूर्ण सहायक नदियों में गिना जाता है। यह नदी महाराष्ट्र और तेलंगाना क्षेत्र के जल संसाधनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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Ajay Kumar Shukla

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Ajay Kumar Shukla

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