हैदराबाद। पूर्व मंत्री एर्राबेल्ली दयाकर राव ने थोर्रूर में विद्युत विभाग (Electricity Department) कर्मचारियों द्वारा किए जा रहे रिले अनशन में भाग लेकर अपना समर्थन व्यक्त किया। यह आंदोलन विद्युत यूनियन के बैनर तले थोर्रूर डिपो के सामने स्थित बिजली कार्यालय परिसर में आयोजित किया गया, जिसमें कारीगरों, ‘अनमैन्ड’ कर्मचारियों और श्रमिकों की समस्याओं के समाधान की मांग की जा रही है। इस अवसर पर एर्राबेल्ली दयाकर राव (Errabelli Dayakar Rao) ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) के शासनकाल में विद्युत कर्मचारियों के लिए जी.ओ. संख्या 11 लागू किया गया था, जिसके तहत उन्हें कारीगर के रूप में मान्यता देकर नियमित वेतन प्रदान किया गया और उनके परिवारों को सुरक्षा मिली।
केसीआर ने विद्युत कर्मचारियों के जीवन में किया महत्वपूर्ण सुधार
उन्होंने कहा कि ठेका प्रणाली समाप्त कर केसीआर ने विद्युत कर्मचारियों के जीवन में महत्वपूर्ण सुधार किया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के सहयोग से ही केसीआर सरकार ने राज्य में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की, जिससे किसानों की स्थिति मजबूत हुई। उन्होंने आश्वासन दिया कि कर्मचारियों की समस्याओं को केसीआर, के.टी. रामाराव और हरीश राव के संज्ञान में लाकर सरकार पर समाधान के लिए दबाव बनाया जाएगा। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में शैक्षणिक योग्यता के आधार पर कारीगरों का वर्गीकरण, एपीएसईबी सेवा नियमों का कार्यान्वयन, अनमैन्ड कर्मचारियों को कारीगर श्रेणी में शामिल करना तथा आउटसोर्सिंग और ठेका कर्मचारियों को कारीगर का दर्जा देना शामिल है।
न्यूनतम वेतन देने की मांग भी उठाई गई
साथ ही, पीस-रेट कर्मचारियों को जी.ओ. संख्या 11 के अनुसार न्यूनतम वेतन देने की मांग भी उठाई गई। उन्होंने कहा कि राज्य में लगभग 24,000 कर्मचारी लंबे समय से ठेका आधार पर कार्य कर रहे हैं और उनकी सेवाओं को नियमित किया जाना चाहिए। कम वेतन (15,000–16,000 रुपए ) के कारण कर्मचारियों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और अब तक लगभग 200 कर्मचारियों की मृत्यु हो चुकी है। दयाकर राव ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों द्वारा हड़ताल नोटिस देने के बावजूद सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई और इसके विपरीत 1,000 कर्मचारियों को सेवा से हटा दिया गया। उन्होंने सरकार से इन कर्मचारियों को तुरंत बहाल करने की मांग की। इस कार्यक्रम में विद्युत विभाग के कर्मचारी, बीआरएस पार्टी के नेता तथा अन्य लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
1 यूनिट बिजली कितने रुपए की होती है?
बिजली की कीमत राज्य, बिजली कंपनी और उपभोग की श्रेणी पर निर्भर करती है। सामान्यतः घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 1 यूनिट (1 kWh) बिजली का रेट लगभग 4 से 8 रुपये के बीच होता है। कुछ राज्यों में यह दर स्लैब के अनुसार बढ़ती जाती है, यानी जितनी ज्यादा खपत होगी, प्रति यूनिट कीमत भी उतनी अधिक हो सकती है। सरकार समय-समय पर सब्सिडी भी देती है, जिससे वास्तविक बिल कम हो सकता है।
2 किलोवाट बिजली कनेक्शन में क्या-क्या चला सकते हैं?
लगभग 2 किलोवाट लोड वाले कनेक्शन में एक समय पर कई घरेलू उपकरण आराम से चलाए जा सकते हैं। जैसे 2–3 पंखे, 6–8 एलईडी बल्ब, एक टीवी, एक फ्रिज, एक कूलर और कभी-कभी 1 एसी (सीमित उपयोग के साथ)। ध्यान रखना जरूरी है कि सभी भारी उपकरण एक साथ चलाने पर लोड अधिक हो सकता है, जिससे बिजली ट्रिप होने का खतरा रहता है। सही संतुलन बनाकर उपयोग करने से कनेक्शन सुरक्षित रहता है।
300 यूनिट बिजली का बिल कितना होता है?
लगभग 300 यूनिट बिजली का बिल राज्य और टैरिफ स्लैब पर निर्भर करता है। सामान्य अनुमान के अनुसार यह बिल 1500 से 2500 रुपये के बीच हो सकता है। अगर सब्सिडी या फ्री यूनिट की योजना लागू है, तो यह राशि कम भी हो सकती है। इसके अलावा फिक्स्ड चार्ज, मीटर चार्ज और टैक्स भी कुल बिल में शामिल होते हैं, इसलिए अंतिम बिल थोड़ा ऊपर-नीचे हो सकता है।
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