PAK- पाकिस्तान को IMF का 1.2 अरब डॉलर का फंड, संकट से उबरने की कोशिश

Read Time:  1 min
पाकिस्तान
पाकिस्तान
FONT SIZE
GET APP

इस्लामाबाद,। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पाकिस्तान (Pakistan) को 1.2 अरब डॉलर का बेलआउट फंड देने की घोषणा की है, जो उसकी गंभीर आर्थिक स्थिति के बीच बड़ी राहत मानी जा रही है। पाकिस्तान इस समय ऊँची महंगाई, ऊर्जा संकट और विदेशी मुद्रा की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। देश में महंगाई दर 22 प्रतिशत से ऊपर पहुंच चुकी है, जबकि कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित है और तेल-गैस की कमी ने आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित किया है।

7 अरब डॉलर पैकेज का हिस्सा बना नया फंड

यह फंड पाकिस्तान के 7 अरब डॉलर के मौजूदा बेलआउट पैकेज का हिस्सा है, जिसे IMF की एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (ईएफएफ) और रेजिलियंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी (RAF) के तहत दिया जा रहा है। मार्च 2026 में IMF और पाकिस्तान के बीच स्टाफ-लेवल एग्रीमेंट (एसएलए) हुआ था, जिसमें ईएफएफ की तीसरी और आरएसएफ की दूसरी समीक्षा सफलतापूर्वक पूरी की गई। इसके बाद अब यह राशि जारी की जा रही है।

कड़ी शर्तों के साथ मिलेगी राहत

IMF ने स्पष्ट किया है कि यह फंड चरणबद्ध तरीके से जारी होगा और इसके लिए पाकिस्तान को कई सख्त आर्थिक शर्तों का पालन करना होगा। इन शर्तों में टैक्स बेस बढ़ाना, खासकर कृषि, आईटी और रिटेल सेक्टर को टैक्स के दायरे में लाना, और ऊर्जा क्षेत्र में सुधार शामिल हैं। इन्हीं शर्तों के चलते पाकिस्तान को बिजली दरों में भारी वृद्धि करनी पड़ी, जिससे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है।

बातचीत के बाद बनी सहमति

फरवरी और मार्च के बीच IMF प्रतिनिधिमंडल ने कराची और इस्लामाबाद (Islamabad) में बातचीत की, लेकिन शुरुआती दौर में कोई समझौता नहीं हो सका। बाद में वर्चुअल माध्यम से बातचीत जारी रही और अंततः समझौता हुआ। पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका में IMF और विश्व बैंक की बैठकों में भाग लिया, जहां इस फंडिंग को अंतिम रूप दिया गया।

अन्य देशों से भी मिल रही मदद

इस बीच, पाकिस्तान को सऊदी अरब से भी 2 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता मिली है, जिससे उसके विदेशी मुद्रा भंडार में कुछ सुधार हुआ है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने इसकी पुष्टि की है।

राजनीतिक समीकरणों पर भी चर्चा

कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फंडिंग के पीछे वैश्विक राजनीतिक समीकरण भी भूमिका निभा सकते हैं, और इसमें डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेताओं के साथ संबंधों की चर्चा भी होती रही है, हालांकि IMF ने आधिकारिक रूप से इसे केवल आर्थिक सुधारों से जोड़ा है।

अन्य पढ़े: IT सेक्टर में बड़ा झटका, 3 महीनों में 80 हजार छंटनी

आगे की राह चुनौतीपूर्ण

कुल मिलाकर, यह बेलआउट पैकेज पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसके साथ जुड़ी सख्त शर्तें देश के लिए चुनौतीपूर्ण बनी रहेंगी। यह विश्लेषण असीम मुनीर की हालिया ईरान यात्रा और बदलती भू-राजनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

Read More :

Anuj Kumar

लेखक परिचय

Anuj Kumar

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।