दो महिला तस्कर गिरफ्तार, करीब 7.8 किलो गांजा बरामद
हैदराबाद। सिकंदराबाद रेलवे पुलिस, ईगल टीम और रेलवे सुरक्षा बल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय गांजा तस्करी (Inter-state Cannabis Trafficking) गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में आंध्र प्रदेश से गांजा ला रही दो महिला तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उनके कब्जे से 7.866 किलोग्राम गांजा बरामद किया, जिसकी कीमत लगभग 3.93 लाख रुपये बताई गई है। इसके साथ ही दो मोबाइल फोन (Phone) और ट्रेन टिकट भी जब्त किए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पंचाडी रुक्मिणी (56) और सेट्टी कासुलम्मा (44) के रूप में हुई है, जो आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले की रहने वाली हैं। दोनों पहले भी गांजा तस्करी के मामलों में पकड़ी जा चुकी हैं।
5-5 हजार रुपये का लालच देकर किया था तैयार
जांच में सामने आया कि फरार आरोपी ईश्वर राव ने दोनों महिलाओं को 5-5 हजार रुपये का लालच देकर विशाखापट्टनम से सिकंदराबाद तक गांजा लाने के लिए तैयार किया था। 10 अप्रैल को उन्हें गांजे के पैकेट देकर ट्रेन से भेजा गया था। 11 अप्रैल की सुबह सिकंदराबाद पहुंचने के बाद दोनों आरोपी रेलवे स्टेशन के प्रतीक्षालय में खरीदारों का इंतजार कर रही थीं। इसी दौरान पुलिस ने जांच के दौरान उन्हें पकड़ लिया। पुलिस ने बताया कि मामले में मुख्य आरोपी फरार है, जिसकी तलाश जारी है। सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। इस सफल कार्रवाई के लिए वरिष्ठ अधिकारियों ने पुलिस टीम की सराहना की है।
गांजा पकड़े जाने पर कितने साल की सजा होती है?
भारतीय कानून के अनुसार नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में सजा मात्रा और अपराध की गंभीरता पर निर्भर करती है। NDPS Act 1985 के तहत छोटी मात्रा मिलने पर 1 साल तक की सजा या जुर्माना हो सकता है, जबकि अधिक मात्रा या तस्करी के मामलों में 10 से 20 साल तक की कठोर कैद और भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। अदालत परिस्थितियों और सबूतों के आधार पर सजा तय करती है, जिससे नशे के अवैध व्यापार को रोकने में मदद मिलती है।
तस्करी का दूसरा नाम क्या है?
गैरकानूनी तरीके से सामान, ड्रग्स या अन्य वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने की प्रक्रिया को तस्करी कहा जाता है। इसका दूसरा नाम “स्मगलिंग” (Smuggling) होता है। इसमें सीमा या कानून को तोड़कर वस्तुओं का परिवहन किया जाता है। यह अपराध आर्थिक और सामाजिक रूप से हानिकारक होता है, क्योंकि इससे सरकार को नुकसान और समाज में अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।
क्या भारत में गांजा लीगल हैं?
देश में गांजा पूरी तरह से कानूनी नहीं है। NDPS Act 1985 के तहत इसका उत्पादन, बिक्री और उपयोग प्रतिबंधित है। हालांकि कुछ राज्यों में भांग (कैनाबिस के पत्तों से बनी वस्तु) सीमित रूप में सरकारी नियंत्रण में बेची जाती है। गांजा (फूल/रेजिन) पर सख्त पाबंदी है और इसके उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है, इसलिए इसे अवैध माना जाता है।
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