हैदराबाद। तेलंगाना कृषि विभाग (Department of Agriculture) द्वारा आयोजित “रैतु नेस्तम” के 92वें एपिसोड में मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में कमी तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम में राज्यभर के लगभग 1,600 केंद्रों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किसानों और कृषि अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में तुम्मला नागेश्वर राव (Tummala Nageswara Rao) शामिल हुए। इस अवसर पर कृषि विभाग के सचिव के. सुरेंद्र मोहन, कृषि विभाग के निदेशक डॉ. बी. गोपी, उद्यान विभाग की निदेशक यास्मीन बाशा तथा तेलंगाना सीड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के अध्यक्ष अन्वेश रेड्डी सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री ने किसानों को सब्सिडी पर हरी खाद के बीज और जिप्सम उर्वरक वितरित किए।
किसान नेस्तम के 92वें एपिसोड में मृदा स्वास्थ्य संरक्षण पर जोर
साथ ही प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना राज्य कृषि विश्वविद्यालय की प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. श्रीदेवी ने किसानों को हरी खाद फसलों की खेती तथा जिप्सम उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने संबंधी तकनीकी जानकारी दी। इस दौरान किसानों ने अपने अनुभव भी साझा किए। खम्मम जिले के किसान महेश रघुनाथपल्ली ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर होने के बावजूद ऑयल पाम की खेती से हो रहे लाभों की जानकारी दी। वहीं संगारेड्डी जिले के रंजोल गांव के किसान नागेश्वर रेड्डी ने जिप्सम उपयोग से क्षारीय भूमि में हुए सुधार और बागवानी फसलों में बढ़े मुनाफे पर प्रकाश डाला। कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने कहा कि राज्य सरकार मृदा स्वास्थ्य संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
1.39 लाख क्विंटल बीज वितरण का लक्ष्य
उन्होंने कहा कि बेहतर उत्पादन के लिए भूमि की उर्वरता अत्यंत महत्वपूर्ण है और किसानों को इस दिशा में विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बताया कि जीलुग, जनुमु और पिल्लीपेसरा जैसी हरी खाद फसलों के बीज किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वर्ष 2025 के खरीफ सीजन में 61.27 करोड़ रुपये की सब्सिडी के साथ 0.87 लाख क्विंटल बीज 1.89 लाख किसानों को वितरित किए गए, जिससे 7.05 लाख एकड़ क्षेत्र में हरी खाद फसलों की खेती हुई। मंत्री ने बताया कि खरीफ 2026 के लिए 113.27 करोड़ रुपये की सब्सिडी के साथ 1.39 लाख क्विंटल बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिससे लगभग 11.22 लाख एकड़ क्षेत्र में खेती कराई जाएगी।
किसानों को 90 प्रतिशत सब्सिडी पर जिप्सम उपलब्ध कराया जा रहा
इसके अलावा “सॉयल हेल्थ एंड फर्टिलिटी” योजना के तहत क्षारीय भूमि सुधार के लिए किसानों को 90 प्रतिशत सब्सिडी पर जिप्सम उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य के 22 जिलों में 11,456 मीट्रिक टन जिप्सम वितरण की योजना बनाई गई है, जिसमें से 10 जिलों में 3,523 मीट्रिक टन जिप्सम पहले ही उपलब्ध कराया जा चुका है। कार्यक्रम के अंत में विभिन्न जिलों के किसानों द्वारा पूछे गए खेती संबंधी सवालों के जवाब कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों ने दिए।
तेलंगाना में किसानों के लिए नई योजना क्या है?
राज्य सरकार किसानों को आर्थिक सहायता, सिंचाई सुविधा और फसल सुरक्षा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। रैतु भरोसा जैसी पहल के माध्यम से पात्र किसानों को निवेश सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा बीज, खाद और कृषि उपकरणों पर सब्सिडी भी दी जाती है। खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष सिंचाई परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है।
तेलंगाना में किसका गवर्नमेंट है?
वर्तमान समय में तेलंगाना में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सरकार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी राज्य का नेतृत्व कर रहे हैं। विधानसभा चुनाव में बहुमत मिलने के बाद कांग्रेस ने सरकार बनाई थी। प्रशासन द्वारा विकास, शिक्षा, कृषि और कल्याणकारी योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हैदराबाद राज्य की राजधानी और प्रमुख प्रशासनिक केंद्र है।
तेलंगाना राज्य में प्रति माह एक कृषि अधिकारी का वेतन कितना है?
सरकारी वेतनमान और अनुभव के आधार पर कृषि अधिकारी की मासिक सैलरी तय होती है। शुरुआती स्तर पर यह वेतन लगभग 45 हजार से 70 हजार रुपये या उससे अधिक हो सकता है। इसके साथ महंगाई भत्ता, यात्रा भत्ता और अन्य सरकारी सुविधाएं भी दी जाती हैं। पदोन्नति और सेवा अवधि बढ़ने पर वेतन में वृद्धि होती है। भर्ती नियम और वेतन आयोग की सिफारिशें वेतन संरचना तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कृषि में कितने विभाग होते हैं?
खेती और ग्रामीण विकास से जुड़े कई प्रमुख विभाग इस क्षेत्र के अंतर्गत कार्य करते हैं। इनमें फसल उत्पादन, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सिंचाई, कृषि अनुसंधान और कृषि विपणन जैसे विभाग शामिल माने जाते हैं। अलग-अलग राज्यों में विभागों की संख्या और संरचना अलग हो सकती है। किसानों को तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए ये विभाग मिलकर काम करते हैं।
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