बीआरएस एमएलसी कविता ने कांग्रेस सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
हैदराबाद । बीआरएस एमएलसी के कविता ने तेलंगाना की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला करते हुए इसे “गरीब विरोधी” और “दलित विरोधी” नीतियां बताया। वह तेलंगाना समाज कल्याण आवासीय शैक्षणिक संस्थानों के एक वरिष्ठ अधिकारी के कथित ऑडियो क्लिप पर प्रतिक्रिया दे रही थीं, जिसमें उन्हें शिक्षकों और कर्मचारियों से छात्रों से शौचालय साफ करवाने और रसोई संभालने के लिए कहते हुए सुना जा सकता है। उन्होंने अधिकारी को तत्काल हटाने तथा समाज कल्याण विद्यालयों को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए हर माह आवश्यक धनराशि जारी करने की मांग की।
एक्स पर ऑडियो क्लिप शेयर करते हुए बीआरएस एमएलसी के कविता ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस तरह का व्यवहार भेदभावपूर्ण, शोषणकारी है और बाल अधिकारों और सम्मान के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा, ‘यह केवल रेवंत रेड्डी सरकार की हाशिए पर पड़े लोगों के प्रति अवमानना को दर्शाता है।’

अधिकारी बच्चों को शौचालय साफ करने के लिए कर रहे मजबूर
बीआरएस एमएलसी ने याद दिलाया कि पिछली बीआरएस सरकार के दौरान, प्रत्येक गुरुकुल स्कूल को चार सफाई कर्मचारियों को काम पर रखने के लिए 40,000 रुपये प्रति माह आवंटित किए गए थे। अगस्त 2023 में कांग्रेस सरकार ने इन पदों को खत्म कर दिया। इसके अलावा, 240 स्कूलों में सहायक देखभालकर्ताओं की भूमिका कथित तौर पर समाप्त कर दी गई है, जिससे छात्रों पर झाड़ू लगाने, शौचालय की सफाई और छात्रावास के रख-रखाव का बोझ आ गया है।
उन्होंने कहा, ‘अब अधिकारी बच्चों को स्कूलों में शौचालय साफ करने के लिए मजबूर कर रहे हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि आईएएस अधिकारी द्वारा कथित तौर पर दिए गए बयान, हाशिए पर पड़े समुदायों के छात्रों को जाति और वर्ग के पूर्वाग्रह से बचाने के लिए गुरुकुल स्थापित करने की अवधारणा के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा, ‘यह श्रम की गरिमा नहीं सिखा रहा है, बल्कि बच्चों को मजदूर के रूप में काम करने और जाति-आधारित शोषण में लिप्त कर रहा है।’
क्या उक्त अधिकारी अपने बच्चों से स्कूल के कॉमन टॉयलेट साफ करवाएंगे?’
कविता ने हाल ही में कामारेड्डी जिले के भिक्कनूर में हुई एक त्रासदी की याद दिलाई, जहां एक चौकीदार पानी की टंकी साफ करते समय मर गया और दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। उन्होंने कहा, ‘आवश्यक कर्मचारियों को नियुक्त करने के बजाय, सरकार खतरनाक और अपमानजनक ज़िम्मेदारियों को बच्चों पर डाल रही है।’ उन्होंने ऑडियो क्लिप में अधिकारी की टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि गुरुकुल स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे पॉश परिवारों से नहीं आते, इसलिए उनके साथ अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता। उन्होंने पूछा, ‘कक्षाओं में ब्लैकबोर्ड और कॉमन टॉयलेट साफ करना एक जैसा नहीं है। क्या उक्त अधिकारी अपने बच्चों से स्कूल के कॉमन टॉयलेट साफ करवाएंगे?’
कविता ने तर्क दिया कि गुरुकुल स्कूल, जो एससी/एसटी छात्रों को सशक्त बनाने और उन्हें जातिगत भेदभाव से बचाने के लिए स्थापित किए गए थे, अब कांग्रेस सरकार के तहत जबरन मजदूरी और अपमान के केंद्र बन रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, ‘हम सामाजिक न्याय के लिए बने संस्थानों को उत्पीड़न के मंच में बदलने की अनुमति नहीं दे सकते।’
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