हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी (A. Revanth Reddy) ने मंगलवार को कहा कि वार्ड सदस्य, सरपंच, कॉर्पोरेटर, अध्यक्ष और मेयरों को राज्य के 99-दिन के विकास कार्यक्रम में सक्रिय भागीदार बनाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी वार्ड सदस्य, सरपंच, अध्यक्ष, कॉर्पोरेटर्स और मेयरों के लिए जिला मुख्यालय में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाए। उन्होंने कहा कि उनके कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को समझाने वाले मुद्रित सामग्री का वितरण किया जाए, ताकि जागरूकता (awareness) बढ़े और ग्राम स्तर पर शासन बेहतर हो सके।नरेवंत रेड्डी ने राज्य में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
लाभार्थियों का विवरण गांव और वार्ड सभाओं में साझा किया जाए
उन्होंने कहा कि किसानों को पारंपरिक कृषि पंप सेट के बजाय सौर पंप सेट अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। किसानों को सौर मोटरों के लाभ स्पष्ट रूप से बताए जाने चाहिए, और विद्युत विभाग को गाँवों में सौर ऊर्जा से जुड़े आय सृजन के तरीकों के बारे में जागरूकता फैलानी चाहिए। उन्होंने आगे निर्देश दिया कि नए जारी किए गए राशन कार्ड, फाइन ग्रेड चावल वितरण, इंदिरम्मा हाउस, 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली, ऋण माफी, मुफ्त बस यात्रा और 500 रुपये में गैस सिलेंडर के लाभार्थियों का विवरण गांव और वार्ड सभाओं में साझा किया जाए। इन कल्याणकारी योजनाओं के लाभों को ग्राम, मंडल, विधानसभा क्षेत्र और जिला स्तर पर जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाना चाहिए।
चेहरे की पहचान लागू करने पर भी जोर दिया
सार्वजनिक स्वास्थ्य को मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के 35 सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सेवाओं का पूरा उपयोग किया जाना चाहिए। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचजी) और अन्य स्थानीय चिकित्सा संस्थान मरीजों को उन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में रेफ़र करें जहाँ उन्नत चिकित्सा उपकरण, डॉक्टर, प्रोफेसर और मेडिकल छात्र उपलब्ध हों। मुख्यमंत्री ने सभी सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के लिए फ़ेसियल रिकग्निशन (चेहरे की पहचान) लागू करने पर भी जोर दिया, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने बताया कि आशारा पेंशन में फ़ेसियल रिकग्निशन लागू करने से लगभग तीन लाख गैर-योग्य लाभार्थियों को हटाया गया, जो तकनीक के दुरुपयोग के कारण अनुचित लाभ ले रहे थे।
ड्राइवरों के लिए नेत्र परीक्षण आयोजित किए जाएँ
योग्य लाभार्थियों को लाभ बिना किसी बाधा के मिले, जबकि गैर-योग्य व्यक्तियों को बाहर किया जाना चाहिए। परिवहन क्षेत्र में उन्होंने विभाग को निर्देश दिया कि स्कूल बसों और अन्य वाहनों के लिए डेटा डिजिटलीकरण पूरा किया जाए और उचित फिटनेस टेस्ट किए जाएँ। आरटीसी बस ड्राइवरों तथा ट्रकों और माल ढुलाई वाहनों के ड्राइवरों के लिए नेत्र परीक्षण आयोजित किए जाएँ। जहाँ ड्राइवर इकट्ठा होते हैं वहाँ विशेष कैंप आयोजित किए जाएँ। परिवहन विभाग नागरिकों की शिकायतों के लिए बड़े गड्ढे और दुर्घटना-प्रवण स्थलों की रिपोर्ट करने हेतु व्हाट्सएप नंबर भी शुरू करे, ताकि तुरंत मरम्मत और सुरक्षा उपाय किए जा सकें।

बड़ी मात्रा में कचरा और निर्माण अपशिष्ट फेंका जा रहा
पर्यावरण संबंधी चिंताओं पर ध्यान देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बाहरी रिंग रोड (ओआरआर) और इसके सेवा मार्गों के किनारे बड़ी मात्रा में कचरा और निर्माण अपशिष्ट फेंका जा रहा है। उन्होंने निर्देश दिया कि ऐसे अपशिष्ट ले जाने वाली वाहनों को जब्त कर जुर्माना लगाया जाए और उनके मालिकों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए। ओआरआर के प्रबंधन करने वाली एजेंसी को भी ऐसे उल्लंघनों को रोकने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाए। उन्होंने आगे निर्देश दिया कि मिड-डे मील एजेंसियों के बिल हर महीने बिना किसी देरी के निस्तारित किए जाएँ, ताकि स्कूल बच्चों के लिए पोषण की निरंतरता सुनिश्चित हो। इस कार्यक्रम को मजबूत बनाने के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार की जाए।
मुख्यमंत्री का पूरा नाम क्या है?
मुख्यमंत्री किसी राज्य की सरकार का प्रमुख होता है। अलग-अलग राज्यों में मुख्यमंत्री का नाम अलग होता है। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath हैं, जबकि तेलंगाना के मुख्यमंत्री A. Revanth Reddy हैं। इसलिए “मुख्यमंत्री का पूरा नाम” राज्य के अनुसार अलग-अलग होता है।
पहली लड़की सीएम कौन है?
भारत में किसी राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री Sucheta Kriplani थीं। वे 1963 में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और बाद में राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनकर इतिहास रचा।
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