Action : मोस्ट वांटेड महिला माओवादी नेता श्री विद्या हैदराबाद में गिरफ्तार

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5 लाख रुपये का था इनाम

हैदराबाद। मियापुर पुलिस (Miyapur Police) ने प्रतिबंधित भाकपा (माले) की मोस्ट वांटेड राज्य समिति सदस्य एन श्री विद्या उर्फ करुणा को न्यू हफीजपेट से गिरफ्तार कर लिया। उस पर 5 लाख रुपये का इनाम था। श्री विद्या, डीकेएसजेडसी की राज्य समिति के सदस्य और आईपीएस अधिकारी उमेश चंद्र की हत्या और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री (CM) एन चंद्रबाबू नायडू से जुड़े अलीपिरी विस्फोट की घटना में मुख्य संदिग्ध टी वासुदेव राव उर्फ आशना की पत्नी हैं।

जेएनटीयू से की इंजीनियरिंग की पढ़ाई

पुलिस ने बताया कि नागरकुरनूल जिले की रहने वाली श्री विद्या ने हैदराबाद के जेएनटीयू से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी और 1992 में माओवादी पार्टी में शामिल हो गई थी। उसके भाई-बहन भी पार्टी के सक्रिय सदस्य थे। शुरुआत में उन्होंने प्रतिबंधित भाकपा (माले) के अग्रिम संगठन, पीडब्ल्यूजी, चैतन्य महिला समाख्या के लिए काम किया। बाद में, वह 2006 में एक भूमिगत (यूजी) कैडर के रूप में प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) पार्टी में शामिल हो गईं।

पार्टी की विचारधारा का किया प्रचार

उन्होंने विशाखापत्तनम, मलकानगिरी में आदिवासी बच्चों और युवाओं के बीच पार्टी की विचारधारा का प्रचार किया, जिसके कारण छत्तीसगढ़ के नारायणपुर, कांकेर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा जिले के आदिवासी समुदायों के कई बच्चे और युवा सीपीआई (माओवादी) पार्टी में शामिल हुए। इसके बाद, उन्हें एसीएम, डीसीएम और एससीएम (क्रमशः क्षेत्र, मंडल और राज्य समिति सदस्य) के पद पर पदोन्नत किया गया। वह 2019 में एलबी नगर में दर्ज एक आपराधिक साजिश के मामले में भी शामिल थीं।

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माओवादी किसे कहते हैं?

समाज में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए सशस्त्र संघर्ष और हिंसा का सहारा लेने वाले विचारधारा से जुड़े लोगों को माओवादी कहा जाता है। ये माओ ज़ेदोंग के सिद्धांतों से प्रेरित होते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों से सत्ता हथियाने की रणनीति अपनाते हैं।

नक्सलवाद और माओवाद में क्या अंतर है?

नक्सलवाद भारत में 1967 में नक्सलबाड़ी आंदोलन से शुरू हुआ, जबकि माओवाद चीन के माओ ज़ेदोंग के विचारों से प्रभावित है। नक्सलवाद एक क्षेत्रीय आंदोलन था, जबकि माओवाद एक वैश्विक कम्युनिस्ट रणनीति है, जिसे नक्सलवादी संगठनों ने बाद में अपनाया।

माओवादी राजनीति क्या है?

यह एक वैकल्पिक सत्ता संरचना स्थापित करने की विचारधारा है, जिसमें लोकतांत्रिक संस्थाओं की जगह वर्ग संघर्ष और जनयुद्ध के ज़रिए सत्ता परिवर्तन की बात की जाती है। इसमें राज्य के खिलाफ हिंसक आंदोलन और ग्रामीण क्रांति की नीति अपनाई जाती है।

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