केन्द्रीय मंत्रियों को औपचारिक ज्ञापन सौंपा गया
हैदराबाद। तेलंगाना सरकार ने केंद्र सरकार से सम्मक्का–सरलम्मा जातरा (Sammakka-Saralamma Jathara) को राष्ट्रीय पर्व घोषित करने की माँग की है। तेलंगाना के मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी, सीतक्का और अदलुरी लक्ष्मण ने गुरुवार को मुलुगु ज़िले के सम्मक्का–सरलम्मा मंदिर (Sammakka-Saralamma Temple) के दौरे के दौरान केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम और केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी को इस संबंध में औपचारिक ज्ञापन सौंपा। इस अवसर पर राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने कहा कि यह लोगों की सरकार बनने के बाद आयोजित होने वाली दूसरी सम्मक्का–सरक्का जातरा है। बाद में मेडारम मंदिर परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में सरकार ने इस ऐतिहासिक जनजातीय पर्व को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए कई स्थायी विकास कार्य किए गए हैं।

लंबे समय से लंबित माँग शीघ्र होगी पूरी
केंद्रीय मंत्रियों की मेडारम यात्रा से उन्होंने आशा जताई कि यह लंबे समय से लंबित माँग शीघ्र पूरी होगी। उन्होंने सम्मक्का–सरक्का जातरा को जनजातीय आत्मसम्मान का प्रतीक बताते हुए कहा कि इसका पैमाना और महत्व कुंभ मेले के समान है। पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने महाजातरा के सफल आयोजन में योगदान देने वाले सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, विभिन्न विभागों तथा जनसंचार माध्यमों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर पंचायत राज, ग्रामीण विकास एवं महिला एवं बाल कल्याण मंत्री दानसरी अनसूया (सीतक्का) ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार प्रभारी मंत्री की निगरानी में मात्र 90 दिनों के भीतर मंदिर विकास और आवश्यक बुनियादी ढाँचे के कार्य पूरे किए गए।

की गई हैं व्यापक व्यवस्थाएँ
उन्होंने बताया कि आमतौर पर चार दिनों तक चलने वाली जातरा के लिए इस बार अभूतपूर्व भीड़ को देखते हुए व्यापक व्यवस्थाएँ की गई हैं। मंत्री अदलुरी लक्ष्मण कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार गद्देलु के पुनर्निर्माण सहित सभी आधारभूत कार्य निर्धारित समय में पूरे किए गए। उन्होंने केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम को ज्ञापन सौंपकर जातरा को राष्ट्रीय पर्व घोषित करने और केंद्र से अधिक वित्तीय सहायता की माँग की।

मेडाराम जतारा का क्या महत्व है?
तेलंगाना का यह विशाल आदिवासी पर्व सम्मक्का-सारलम्मा देवी की स्मृति में मनाया जाता है। यह अन्याय के खिलाफ आदिवासी संघर्ष, प्रकृति पूजा और सामाजिक समानता का प्रतीक है। इसमें करोड़ों श्रद्धालु भाग लेते हैं और इसे एशिया का सबसे बड़ा जनजातीय मेला माना जाता है।
2026 में मेडाराम जतारा कब था?
यह भव्य उत्सव वर्ष 2026 में जनवरी महीने के अंतिम सप्ताह में आयोजित हुआ था। परंपरागत रूप से यह माघ पूर्णिमा के आसपास चार दिनों तक चलता है। इन दिनों लाखों श्रद्धालु मेदाराम पहुंचकर देवी सम्मक्का और सारलम्मा के दर्शन करते हैं।
तेलंगाना में सबसे बड़ा आदिवासी त्योहार कौन सा है?
सम्मक्का-सारलम्मा मेदाराम जतारा को राज्य का सबसे बड़ा आदिवासी त्योहार माना जाता है। यह प्रत्येक दो वर्ष में आयोजित होता है और इसमें देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। यह त्योहार आदिवासी संस्कृति, आस्था और परंपराओं को जीवित रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
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