हैदराबाद। महिला एवं बाल कल्याण मंत्री दानसरी अनसूया सीतक्का (Dansari Anasuya Sitakka) ने बुधवार को मेघालय का आधिकारिक दौरा कर वहां की आंगनवाड़ी सेवाओं और नवोन्मेषी बाल विकास कार्यक्रमों का अध्ययन किया। अपने दौरे के दौरान मंत्री के साथ सचिव अनिता रामचंद्रन, निदेशक श्रुति ओझा और संयुक्त निदेशक मोती सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मंत्री ने कई आंगनवाड़ी केंद्रों का दौरा कर उनकी कार्यप्रणाली का बारीकी से अवलोकन किया। सीतक्का ने कहा कि मेघालय में आंगनवाड़ी केंद्र अब केवल पोषण वितरण (Nutrition Delivery) तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा को एकीकृत करते हुए समग्र बाल विकास के केंद्र बन चुके हैं।
बच्चों में सीखने के प्रति बढ़ रही रुचि
उन्होंने खेल-आधारित शिक्षण पद्धतियों और रचनात्मक वातावरण की सराहना की, जिससे बच्चों में सीखने के प्रति रुचि बढ़ रही है। मंत्री ने विशेष रूप से मेघालय अर्ली चाइल्डहुड डेवलपमेंट मिशन की प्रशंसा की, जो 0 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा को समन्वित रूप से लागू करता है। इसके अलावा ‘1000 डेज़ प्रोग्राम’ को भी उन्होंने उल्लेखनीय बताया, जो गर्भावस्था से लेकर बच्चे के दो वर्ष की आयु तक मां और शिशु की समग्र देखभाल सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि जीवन के पहले तीन वर्ष अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इस अवधि में मस्तिष्क का 75 प्रतिशत से अधिक विकास होता है।
जागरूकता अभियानों की भी की सराहना
इस संदर्भ में माता-पिता के लिए चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों की भी उन्होंने सराहना की। सीतक्का ने कहा कि केंद्र सरकार के सुझावों के अनुरूप तेलंगाना में भी मेघालय के इस सफल मॉडल की श्रेष्ठ प्रक्रियाओं को अपनाने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। उन्होंने कहा कि मेघालय की आंगनवाड़ी व्यवस्था पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल है।
आंगनवाड़ी फॉर्म भरने की अंतिम तिथि क्या है?
आवेदन की अंतिम तिथि हर राज्य और जिले के अनुसार अलग-अलग तय होती है, इसलिए एक निश्चित तारीख सभी जगहों पर लागू नहीं होती। भर्ती प्रक्रिया महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा समय-समय पर जारी की जाती है। सही जानकारी के लिए अपने राज्य या जिले की आधिकारिक वेबसाइट या नोटिफिकेशन देखना जरूरी होता है, जहां तिथि और योग्यता से जुड़ी पूरी जानकारी दी जाती है।
आंगनवाड़ी में टीचर की सैलरी कितनी होती है?
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (टीचर) की सैलरी राज्य के अनुसार अलग होती है, लेकिन सामान्यतः यह लगभग 8,000 से 12,000 रुपये प्रति माह के बीच होती है। वहीं सहायिका (Helper) को लगभग 4,000 से 7,000 रुपये तक मानदेय मिलता है। यह स्थायी सरकारी नौकरी नहीं होती, बल्कि मानदेय आधारित सेवा होती है, जिसमें समय-समय पर बढ़ोतरी भी की जाती है।
Read Telugu News: https://vaartha.com/
यह भी पढ़ें :