दमरे आशुलिपिक संगठन की वार्षिक साधारण सभा संपन्न
हैदराबाद। दक्षिण मध्य रेलवे आशुलिपिक संगठन (साउथ सेंट्रल रेलवे स्टेनोग्राफर्स एसोसिएशन) द्वारा आज रेलवे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स (आरएससी), सिकंदराबाद में वार्षिक साधारण सभा (AGB) का भव्य आयोजन किया गया। यह सभा आशुलिपिकों के जनक सर आइजैक पिटमैन (4 जनवरी 1813 – 22 जनवरी 1897) की स्मृति में आयोजित की गई। कार्यक्रम में एनएफआईआर/एससीआरईएस के महासचिव डॉ. एम. राघवय्या (Dr. M.Raghavayya) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सभा का आयोजन जोनल अध्यक्ष टी. अनिल कुमार और जोनल सचिव जे. रामकृष्ण के नेतृत्व में किया गया।
‘लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड’ मेमेंटो प्रदान कर किया सम्मानित
इस अवसर पर डॉ. एम. राघवय्या ने दक्षिण मध्य रेलवे के सात सेवानिवृत्त वरिष्ठ आशुलिपिकों को उनके दशकों तक चले निस्वार्थ और अथक सेवा कार्यों के सम्मान में ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड’ मेमेंटो एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में आशुलिपिकों की भूमिका को रेलवे प्रशासन की रीढ़ बताते हुए संगठन की एकता, समर्पण और कर्मचारियों के कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आशुलिपिकों का योगदान प्रशासनिक कार्यों में अत्यंत महत्वपूर्ण है और संगठन को उनके हितों की रक्षा के लिए निरंतर सक्रिय रहना चाहिए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आशुलिपिकों एवं संगठन के पदाधिकारियों ने भाग लिया।

रेलवे प्रशासन क्या है?
प्रशासन का अर्थ है रेलवे नेटवर्क के संचालन, रखरखाव और प्रबंधन की पूरी व्यवस्था। इसमें ट्रेनों की समय-सारिणी बनाना, सिग्नलिंग सिस्टम का नियंत्रण, स्टेशन संचालन, कर्मचारियों का नियोजन और यात्री सुविधाओं की देखभाल शामिल होती है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य ट्रेनों को सुरक्षित, समय पर और सुचारू रूप से चलाना होता है। इसके लिए रेल मंत्रालय, जोनल ऑफिसर और स्टेशन स्तर के अधिकारी मिलकर काम करते हैं, ताकि पूरे नेटवर्क में सुचारु संचालन बना रहे।
रेलवे का पिता कौन है?
भारतीय रेलवे का पिता सर जॉर्ज क्लाइव या सर जॉर्ज स्टोक नहीं बल्कि सर जॉर्ज क्लाइव या लॉर्ड विलियम बेंटिक के समय में रेलवे की नींव रखी गई थी, लेकिन आधुनिक भारतीय रेलवे की योजना और विकास में प्रमुख योगदान देने वाले व्यक्ति को अक्सर सर जॉन कंडली या सर जॉन मैथ्यूज कहा जाता है। यह व्यक्ति ब्रिटिश शासन के दौरान रेलवे नेटवर्क के विस्तार और योजनाओं के लिए जिम्मेदार थे।
रेलवे में सबसे ऊंचा पद किसका है?
भारतीय रेलवे में सबसे ऊंचा पद रेलवे बोर्ड के चेयरमैन का होता है। यह अधिकारी सीधे केंद्रीय रेल मंत्रालय के अधीन काम करता है और पूरे देश के रेलवे संचालन, नीति निर्माण, बजट और विकास योजनाओं के लिए जिम्मेदार होता है। बोर्ड के सदस्य विभिन्न विभागों जैसे यात्री सेवा, माल परिवहन, तकनीकी और वित्त की देखरेख करते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय और प्रशासनिक शक्ति चेयरमैन के पास होती है।
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