Hyderabad : तेलंगाना में श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध – विवेक

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हैदराबाद। श्रम एवं खनन मंत्री जी. विवेक वेंकटस्वामी (G. Vivek Venkataswamy) ने कहा है कि तेलंगाना सरकार श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और उनके कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। शुक्रवार को हैदराबाद स्थित रवींद्र भारती में आयोजित मजदूर दिवस कार्यक्रम में उन्होंने पर्यटन मंत्री जुपल्ली कृष्णा राव, बेल्लमपल्ली विधायक जी. विनोद, पेद्दापल्ली सांसद गद्दम वंशी कृष्णा, श्रमिक नेताओं और अधिकारियों के साथ भाग लिया। इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि पहले श्रमिकों को बुनियादी अधिकारों की कमी, लंबे कार्य घंटे और न्यूनतम वेतन न मिलने जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि पूर्व नेताओं ने श्रमिकों के अधिकारों के लिए कड़ा संघर्ष किया। अपने पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री काका वेंकटस्वामी (Kaka Venkataswami) का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में बड़े पैमाने पर श्रमिक आंदोलन हुए थे।

प्रबंधन और श्रमिकों के बीच सहयोग का माहौल हुआ बेहतर

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रबंधन और श्रमिकों के बीच सहयोग का माहौल बेहतर हुआ है और दोनों मिलकर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं, जिसमें श्रमिकों के कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मंत्री ने बताया कि राज्य में 120 उन्नत प्रौद्योगिकी केंद्रों के माध्यम से लगभग 20 हजार युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और श्रमिकों के बच्चों को विशेष अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कृषि से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करने की भी जानकारी दी, जिससे उत्पादकता बढ़ाई जा सके। उन्होंने बताया कि बजट में श्रम विभाग के लिए 90 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। टॉमकॉम के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षण देकर जर्मनी जैसे देशों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

बीमा राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई

मंत्री ने यह भी घोषणा की कि निर्माण श्रमिकों के लिए बीमा राशि 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है और हमालों के कल्याण के लिए भी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की सोच से प्रेरित होकर राज्य सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म आधारित श्रमिकों को कानूनी सुरक्षा देने के लिए विशेष कानून बनाया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी राज्य बीमा योजना के माध्यम से श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं और इन्हें और विस्तारित करने के प्रयास जारी हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पर्यटन मंत्री जुपल्ली कृष्णा राव ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में श्रमिकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और उनके लिए जितना भी किया जाए, वह कम है।

उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को उसके काम के आधार पर छोटा नहीं समझना चाहिए और सभी को सम्मान मिलना चाहिए। पेद्दापल्ली सांसद गद्दम वंशी कृष्णा ने कहा कि बी.आर. अम्बेडकर ने संविधान में श्रमिकों के अधिकारों को विशेष महत्व दिया था। उन्होंने कहा कि आठ घंटे कार्य दिवस का सिद्धांत आज भी समाज का मार्गदर्शन कर रहा है। कार्यक्रम में श्रम विभाग की सचिव दासरी हरिचंदना, श्रम आयुक्त पामेला सत्पथी, श्रमिक नेता और बड़ी संख्या में श्रमिक उपस्थित रहे।

1 मई को मजदूर दिवस क्यों मनाया जाता है?

यह दिन श्रमिकों के अधिकारों, सम्मान और उनके योगदान को मान्यता देने के लिए मनाया जाता है। 1 मई 1886 को अमेरिका के शिकागो में मजदूरों ने 8 घंटे काम की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन किया था। इस संघर्ष में कई मजदूरों ने बलिदान दिया। उनकी याद में हर वर्ष 1 मई को मजदूर दिवस मनाया जाता है, ताकि श्रमिकों के अधिकारों और सामाजिक न्याय के महत्व को याद रखा जा सके।

मजदूर दिवस के जनक कौन हैं?

आंदोलन को संगठित रूप देने में कई नेताओं का योगदान रहा, लेकिन पीटर मैकग्वायर को अक्सर मजदूर दिवस का जनक माना जाता है। वे अमेरिका के एक प्रमुख श्रमिक नेता और बढ़ई थे। उन्होंने श्रमिकों के लिए बेहतर वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और उचित काम के घंटे की मांग उठाई। उनके प्रयासों से श्रमिक अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ी और मजदूर दिवस की परंपरा मजबूत हुई।

मजदूर दिवस का इतिहास क्या है?

इसकी शुरुआत 19वीं सदी में औद्योगिक क्रांति के दौरान हुई, जब मजदूरों से लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में काम कराया जाता था। 1886 में शिकागो के हेमार्केट आंदोलन ने श्रमिक अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा दी। 1889 में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन में 1 मई को श्रमिक दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। इसके बाद कई देशों में यह दिन मजदूरों के सम्मान में मनाया जाने लगा।

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Ajay Kumar Shukla

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Ajay Kumar Shukla

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