हैदराबाद। तेलंगाना ड्रग्स कंट्रोल प्रशासन (DCA) के अधिकारियों ने एल्काथुर्थी मंडल के दामेरा गांव में एक अवैध क्लिनिक पर छापा मारकर बिना लाइसेंस रखी गई 30 प्रकार की दवाइयां जब्त कीं। ‘फर्स्ट एड क्लिनिक’ नाम से संचालित यह केंद्र स्वर्गम सतीश बाबू द्वारा चलाया जा रहा था, जो बिना किसी योग्यता के चिकित्सा अभ्यास कर रहा था। जब्त दवाओं में एंटीबायोटिक्स (Antibiotics) और स्टेरॉयड शामिल हैं, जिनकी कीमत 21,650 रुपये आंकी गई है। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि एंटीबायोटिक्स का अंधाधुंध उपयोग एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध को बढ़ाता है और स्टेरॉयड का दुरुपयोग गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है। दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं और आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
झोलाछाप डॉक्टर क्या होता है?
बिना मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री, लाइसेंस या पंजीकरण के इलाज करने वाले व्यक्ति को आमतौर पर झोलाछाप डॉक्टर कहा जाता है। ऐसे लोग एलोपैथी, आयुर्वेद या अन्य चिकित्सा पद्धतियों का अवैध रूप से अभ्यास करते हैं। गलत दवाइयों और उपचार के कारण मरीजों की सेहत को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए कानून में इसे अपराध माना गया है।
झोलाछाप डॉक्टर पर कौन सी धारा लगती है?
कानून के अनुसार अवैध रूप से चिकित्सा करने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 336, 337 या 338 (लापरवाही से जान को खतरा) लग सकती है। इसके अलावा मेडिकल काउंसिल एक्ट और क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत भी कार्रवाई होती है, जिसमें जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान है।
झोलाछाप डॉक्टर की शिकायत कहां करें?
ऐसे मामलों की सूचना स्थानीय पुलिस थाने, जिला स्वास्थ्य अधिकारी या मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में दी जा सकती है। राज्य चिकित्सा परिषद और स्वास्थ्य विभाग भी इस तरह की शिकायतें स्वीकार करते हैं। गंभीर मामलों में प्रशासन द्वारा छापेमारी कर क्लिनिक सील किया जाता है और कानूनी कार्रवाई की जाती है।
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