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Indonesia में फिर फटा ज्वालामुखी, दिन में हो गई रात, मची अफरा-तफरी

Anuj Kumar
Anuj Kumar
Indonesia में फिर फटा ज्वालामुखी, दिन में हो गई रात, मची अफरा-तफरी

जकार्ता। इंडोनेशिया (Indonesia) में फिर ज्वालामुखी में भीषण विस्फोट हुआ है। सोमवार सुबह 11:05 बजे ज्वालामुखी फटा। आसमान और आसपास के 18 किलोमीटर की ऊंचाई तक राख और गैस के बादल छा गए और चारों ओर अंधेरा ही अंधेरा छा गया जैसे रात हो गई हो।

ज्वालामुखी फटते ही शहर में हड़कंप मच गया। आसपास के गांव राख की चादर से ढक गए। सरकारी अधिकारियों ने लोगो से गांव खाली करने को कहा है। मीडिया रिपोर्ट (Media Reports) के मुताबिक ज्वालामुखी के फटने के दौरान गर्म गैसों और राख की धधकती हुई धारा बहती नजर आई। यह विस्फोट 18 जून को हुए ज्वालामुखी विस्फोट (volcanic eruption) से भी ज्याद खतरनाक था। लोगों को विस्फोट के सात किलोमीटर के दायरे तक जाने से मना कर दिया गया है।

नवंबर 2024 में इस ज्वालामुखी के फटने से नौ लोगों की मौत हो गई थी

बता दें माउंट लेवोटोबी में लगातार ज्वालामुखी विस्फोट होते रहते हैं। इससे पहले नवंबर 2024 में इस ज्वालामुखी के फटने से नौ लोगों की मौत हो गई थी। इसमें दर्जनों लोग घायल हुए थे। वहीं मार्च और जून 2025 में भी इसके विस्फोटों ने क्षेत्र में हलचल मचाई थी। माउंट लेवोटोबी लाकी-लाकी 1,584 मीटर ऊंचा है। यह पूर्वी नुसा तेंगारा के फ्लोरेस द्वीप पर स्थित एक जुड़वां ज्वालामुखी है, जिसका दूसरा हिस्सा 1,703 मीटर ऊंचा लेवोटोबी पेरेमपुआन है। 270 मिलियन आबादी वाला द्वीपसमूह इंडोनेशिया, प्रशांत महासागर के “रिंग ऑफ फायर” पर स्थित है।

150 किलोमीटर दूर तक राख का बादल दिखाई दिया

यहां अभी 120 ज्वालामुखी सक्रिय हैं और इसमें भूकंपीय गतिविधियां होती रहती हैं। सोमवार को हएु विस्फोट से 150 किलोमीटर दूर तक राख का बादल दिखाई दिया, जिससे कई गांव प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट में इंडोनेशिया की भूवैज्ञानिक एजेंसी के प्रमुख ने चेतावनी दी है कि भारी बारिश होने पर ज्वालामुखीय मलबे से लहार बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा है, जो ज्वालामुखी विस्फोट के बाद होने वाली मलबे और कीचड़ की तेज बहाव वाली धारा को कहते हैं का खतरा है।

स्थानीय लोगों को सात किलोमीटर के दायरे से बाहर रहने और राख से सांस की समस्याओं से बचने के लिए मास्क पहनने की सलाह दी है। निरंतर भूकंपीय गतिविधियों के कारण ज्वालामुखी की निगरानी जारी है। इस विस्फोट की वजह से बाली समेत कई फ्लाइटों पर भी असर हो सकता है। सरकार पूरी तरह इस घटना पर नजर रख रही है और लोगों से वहां ना जाने की अपील कर रही है

विश्व का सबसे बड़ा ज्वालामुखी कहाँ है?

प्रशांत महासागर में स्थित तमू मासिफ को विस्फोट के आधार पर दुनिया का सबसे बड़ा ज्वालामुखी माना जाता है। यह पानी के नीचे का ज्वालामुखी पृथ्वी पर सबसे बड़ा ज्वालामुखी माना जाता है, जिसका क्षेत्रफल 310,000 वर्ग किलोमीटर (120,000 वर्ग मील) और लगभग 2 मिलियन क्यूबिक किलोमीटर (500,000 क्यूबिक मील) है।

ज्वालामुखी का क्या कारण है?

पृथ्वी के मेंटल में उत्पन्न मैग्मा सतह के नीचे के कक्षों में जमा हो सकता है।जब इन कक्षों के भीतर दबाव आसपास की चट्टानों की ताकत से अधिक हो जाता है, तो ज्वालामुखी विस्फोट हो सकता है। जैसे-जैसे पृथ्वी का मेंटल उथली गहराई तक ऊपर उठता है, दबाव में कमी के कारण चट्टानें पिघलती हैं और मैग्मा बनती हैं।

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